Holashtak 2026: होलाष्टक ही नहीं, हिंदू धर्म में इन 5 मौकों पर भी वर्जित होते हैं शुभ कार्य; जानें खरमास से पंचक तक के नियम

होली हिंदू धर्म का बड़ा ही पावन और प्रसिद्ध त्योहार है. हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है. इसके अगले रोज होली खेली जाती है, लेकिन हिंदू धर्म में होली से पहले पड़ने वाले आठ दिन बहुत अशुभ माने जाते हैं. इन दिनों को होलाष्टक के नाम से जाना जाता है. होलाष्टक में शुभ और मांगलिक काम वर्जित माने गए हैं.
इस दौरान न तो शादी-विवाह किया जाता है और न ही कोई बड़ा या शुभ काम किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि होलाष्टक के अलावा भी हिंदू धर्म में पांच ऐसे अवसर आते हैं, जब शुभ और मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में.
खरमास
ग्रहों के राजा सूर्य जब धनु और मीन राशि में प्रवेश करते है, तो खरमास लग जाता है. हिंदू धर्म में खरमास एक माह की अशुभ अवधि मानी जाती है. इस दौरान शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं. मान्यता है कि इस दौरान किए गए मांगलिक कामों का शुभ फल नहीं मिलता.
चातुर्मास
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी तक चार महीने चातुर्मास लग जाता है. चूंकि माना जाता है कि ये चार माह जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और संसार का संचालन भगवान शिव के हाथों में होता है. इस दौरान हिंदू धर्म में शुभ-मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं.
पितृपक्ष
भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तक श्राद्धपक्ष रहता है. इसे पितृपक्ष भी कहा जाता है. ये अवधि 16 दिनों की होती है. इस दौरान सिर्फ पितृ पूजन, पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. इस अवधि मे न तो शुभ काम किए जाते हैं और न ही कपड़े, गहने खरीदे जाते हैं.
ग्रहण काल
हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को भी बहुत महत्व दिया गया है. ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक शुभ काम नहीं किया जाता है. चंद्र ग्रहण से 09 घंटे पहले तो सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल लग हो जाता है.
पंचक
चंद्रमा के धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करने पर पंचक लगता है. ये पांच दिनों की अशुभ अवधि होती है. पंचक में भी शुभ काम नहीं किए जाते हैं.




