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कश्मीरी कहवा का अनोखा स्वाद: कश्मीर से विशेष कहवा लेकर गीता महोत्सव पहुंचीं महजबी

कुरुक्षेत्र  : कुरुक्षेत्र ब्रह्मा सरोवर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव चल रहा है जहां पर देश के अलग-अलग राज्यों से बहुत से दुकानदार शिल्पकला और अपनी खाने-पीने की विरासत यहां लेकर पहुंचे हैं। ऐसे ही एक महजबीन नामक महिला कश्मीर की वादियों से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में पहुंची है जो अपने कश्मीरी कहवा की महक अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में बिखेर रही है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर पहुंच रहे पर्यटक उनके कश्मीरी कहवे का खूब लुफ्त उठा रहे हैं। यह कश्मीर की पारंपरिक और सुगंधित चाय होती है जिसकी खुशबू से अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में आए हुए पर्यटक कश्मीरी कहवा की तरफ खिंचे चले आ रहे हैं।

इस कहवे में मिलाए जाते हैं कई प्रकार के ड्राई फ्रूट्स

कश्मीर से आई हुई महिला दुकानदार महजबीन ने बताया कि वह हर साल की तरह इस साल भी अपना स्पेशल कश्मीरी कहवा यहां पर लेकर पहुंची है जो पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह कई प्रकार के ड्राई फ्रूट के साथ तैयार किया जाता है और कई घंटे आग के ऊपर इसमें उबाल दिया जाता है तब जाकर कश्मीरी कहवा तैयार होता है। इसमें विशेष तौर पर केसर, बादाम , काजू ,किशमिश, इलायची, दालचीनी, गुलाब का आर्क और भी कई प्रकार के ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं तब जाकर कश्मीरी कहवा तैयार होता है।

महजबीन ने बताया कि यह सिर्फ पीने वाला केवल एक पेय पदार्थ ही नहीं यह हमारे कश्मीर की वादियों की प्राचीन परंपरा है। जो बड़े प्यार के साथ और मेहनत के साथ तैयार की जाती है उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग इसको चाय के तौर पर लेते हैं, लेकिन यह किसी औषधि से कम नहीं। इसमें कई प्रकार ड्राई फूड मिलाए जाते हैं तब जाकर यह तैयार होता है। उन्होंने कहा अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शुगर के मरीजों के लिए विशेष तौर पर शुगर फ्री कश्मीरी कहवा लेकर आए हैं। उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खासतौर पर यह तैयार किया गया है जो स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी है। उन्होंने बताया कि वह खास तौर पर कश्मीरी कहवा के लिए जानी जाती है लेकिन कश्मीरी कहवा के साथ-साथ ड्राई फ्रूट की 40 से ज्यादा वैरायटी लेकर पहुंची है। वह कश्मीर से अपने कश्मीरी कहवा को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में जाते हैं जितने भी बड़े शिल्प और सरस मेंले लगते हैं वहां पर सरकार के द्वारा उनका विशेष तौर पर आने के लिए निमंत्रण दिया जाता है क्योंकि वह स्वय सहायता समूह से जुड़ी हुई है जिसके जरिए वह देश के कोने कोने में जाकर अपने कश्मीरी कहवा कि खुशबू वहां पर बिखेर रही है।

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