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10 सालों में ऐसे बदली भारत की इकोनॉमी, देश को मिले 8 लाख करोड़ रुपए

तरक्की की पटरी पर भारत की स्पीड कैसी है. इसे मापने के कई पैमाने हैं. आप चाहें तो भारतीय शेयर बाजार की ग्रोथ को देख सकते हैं या फिर देश की जीडीपी के आकार को. लेकिन जब आपकी नजर देश में आजादी के बाद से हुए निवेश पर जाएगी तब आपको हैरानी होगी कि भारत ने कैसे 14 ट्रिलियन डॉलर का इंवेस्टमेंट हासिल किया है. इसमें आपको एक दिचलस्प आंकड़ा नजर आएगा, जिससे यह मालूम चलता है कि इसमें 14 लाख करोड़ में से 8 लाख करोड़ का निवेश सिर्फ पिछले 10 सालों में आया है. चलिए एक नजर उस रिपोर्ट पर डालते हैं, जिसमें इसकी जानकारी सामने आई है.

क्या कहती है रिपोर्ट?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निवेश-से-जीडीपी अनुपात में एक महत्वपूर्ण मोड़ का भी पता चलता है, जो 2011 से स्थिर बना हुआ था. अब कोविड के बाद सुधार प्रयासों और बढ़े हुए सरकारी खर्च के कारण ठीक हो रहा है. निवेश में तेजी आ रही है.

भारत का शेयर बाजार आर्थिक मजबूती का एक और आधार रहा है, जिसने समय-समय पर होने वाली गिरावट के बावजूद पिछले 33 वर्षों में से 26 वर्षों में सकारात्मक रिटर्न दिया है. 10-20% की अल्पकालिक गिरावट लगभग हर साल होती है, फिर भी बाजार दीर्घकालिक वृद्धि को दिखाता है.

गिरते बाजार में क्या करें निवेशक

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निवेशकों को बाजार में गिरावट के दौरान घबराहट में बिक्री से बचने की सलाह भी देता है, और लॉन्ग टर्म के हिसाब से खरीदारी करने की सलाह भी देता है. भारत का आर्थिक परिदृश्य: उज्ज्वल और आशाजनक मजबूत निवेश गति और लचीले बाजारों के साथ, भारत वैश्विक आर्थिक नेता के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने की राह पर सबसे आगे चल रहा है. जैसे-जैसे निवेश आधार बढ़ता है और जीडीपी अनुपात में सुधार होता है, देश निरंतर विकास और बढ़ी हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है.

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