UGC के नए नियमों पर मचा घमासान: यूपी, बिहार से राजस्थान तक सड़कों पर उतरे छात्र; जानें क्यों हो रहा है इतना विरोध

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून का यूपी, बिहार से लेकर राजस्थान तक जमकर विरोध हो रहा है. यूपी के मेरठ, हापुड़ सहित कई जिलों में छात्र इसके विरोध में पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. हापुड़ में दर्जनों घरों के बाहर इसके विरोध में पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है कि भाजपा नेता वोट मांगने ना आए. साथ ही पोस्टर में यह भी लिखा है कि यह सवर्ण समाज का घर है. पोस्टर पर सवर्ण अगेंस्ट बीजेपी भी लिखा गया है. सिंभावली क्षेत्र के बक्सर में ये पोस्टर लगाए गए हैं.
करणी सेना ने दी चेतावनी
UGC के नए कानून का विरोध करते हुए राजस्थान के अलवर में करणी सेना ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार केंद्र में राम रहीम की लड़ाई लेकर आई है. ये बिल समाज में खाई खोदने का काम करेगा.
इस बिल का सीधा- सीधा प्रभाव सवर्ण कास्ट की पीढ़ी पर पड़ेगा. करणी सेना ने कहा कि इस बिल के विरोध में पूरे देश में आंदोलन होगा. हम दिल्ली कूच करेंगे और जंतर मंतर पर आंदोलन करेंगे.
अनशन करने दिल्ली जा रहे थे पीठाधीश्वर
गाजियाबाद डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने कल नजरबंद कर दिया. वह यूजीसी के नए कानून के विरोध में दिल्ली जाकर अनशन करने वाले थे, लेकिन गाजियाबाद में ही उन्हें पुलिस ने रोक लिया और नजरबंद कर दिया. नरसिंहानंद गिरि ने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार सवर्ण समाज की आवाज को दबाने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि यह बिल पूरी तरह से सवर्ण विरोधी है.
बिहार में भी प्रदर्शन
बिहार के वैशाली स्थित हाजीपुर के ऐतिहासिक कौनहारा घाट पर गज ग्राह के मूर्ति के शिलान्यास व भूमि पूजन में शामिल हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय यूजीसी मुद्दे पर बोलने से बचते नजर आए. कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने UGC से जुड़े सवाल नित्यानंद राय से किया गया तो मंत्री ने सवालों से बचते हुए हर हर महादेव,बाबा हरिहरनाथ की जय,गंगा मैया की जय का जयघोष करते चले गए. वहीं इसके अलावा मधुबनी सहित कई जिलों में सवर्ण समाज के लोग इसका विरोध कर रहे हैं.
क्या है यूजीसी का नया कानून, जिस पर मचा है बवाल?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने हाल ही में यूजीसी एक्ट 2026 इक्विटी रेगुलेशन को लागू किया है, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में तत्काल लागू करने के आदेश दिए गए हैं. विश्वविद्यालयों और काॅलेजों में समानता को बढ़ावा देने के लिए इसे लागू किया जाना है.
नए नियमों के तहत सभी यूनिवर्सिटी और काॅलेजों में अब एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ बनाना अनिवार्य होगा. अभी तक यह केवल एससी और एसटी के लिए ही लागू था.
सबसे ज्यादा बवाल इस बात पर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग को भी ‘जातिगत भेदभाव’ की सूची में शामिल किया गया है. जनरल कैटेगरी के छात्रों का मानना है कि OBC को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस श्रेणी में क्यों रखा गया है.




