ईरान में कोहराम: प्रदर्शनों में मौतों पर छिड़ी जंग, मानवाधिकार संगठन का दावा- 7000 से ज्यादा ने गंवाई जान

ईरान में पिछले महीने देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे. कई जगहों पर ये प्रदर्शन हिंसक हो गए थे. इन्हीं प्रदर्शनों में मरने वालों को लेकर सरकार की तरफ से दावा किया जा रहा है कि 3,117 लोगों की मौत हुई है. जबकि अमेरिका की मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स का दावा है कि इन प्रदश्रनों में 7002 लोगों की जान गई है. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि मरने वालों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है.
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है, जबकि कतर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है. दोनों देशों के बीच लगातार टेंशन बढ़ता ही जा रहा है, जो बीते एक महीने से कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
मौत को लेकर ईरान सरकार अलग दावा
प्रदर्शनों में मरने वालों को लेकर कई तरह के आंकड़े सामने आ रहे हैं. ईरान सरकार की मानें तो इन प्रदर्शनों में 3117 लोगों की मौत हुई है. जबकि अमेरिका की मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि अब तक कम से कम 7,002 लोगों की मौत हो चुकी है. इस संगठन को दावा है कि ईरान में उनका नेटवर्क काफी मजबूत है. उन्हीं की मदद से यह आंकड़ा सामने आया है. दावा यह भी किया गया है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है.
ईरान सरकार पर पहले भी मौत के आंकड़े छुपाने के आरोप लग चुके हैं. ऐसा कहा जाता है कि सरकार ऐसी घटनाओं में मौतों की संख्या कम बताती है.
मध्यस्थता कराने में जुटा चीन
ईरान के सीनियर सिक्योरिटी ऑफिसर अली लारीजानी ने बुधवार को कतर में फॉरेन मिनिस्टर शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी से मुलाकात की. कतर में US का एक बड़ा मिलिट्री इंस्टॉलेशन है, जिस पर ईरान ने जून में हमला किया था. यह हमला तब हुआ था. जब जून में 12 दिन चले ईरान-इज़राइल युद्ध के दौरान US ने ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की थी. लारीजानी ने मंगलवार को फ़िलिस्तीनी हमास मिलिटेंट ग्रुप के अधिकारियों से और ओमान में यमन के तेहरान सपोर्टेड हूथी बागियों से भी मुलाकात की.
लारीजानी ने कहा कि ओमान में अमेरिका से कोई खास प्रस्ताव नहीं मिला, लेकिन दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है.
अमेरिका बढ़ा रहा अपनी मौजूदगी
दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन, युद्धपोत और लड़ाकू विमान मध्य पूर्व भेजे हैं. अमेरिका का कहना है कि वह समझौते के लिए दबाव बनाए रखना चाहता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इलाके में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने पर भी विचार किया जा रहा है.




