शंकर प्रतिमा के रूप में और बिंदु परमात्मा शिव का वास्तविक रूप है: बीके रजनी
भिवानी,(ब्यूरो): रूद्रा कॉलोनी प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय दिव्य भवन की तरफ से शिवरात्रि महोत्सव की श्रृंखला के अंदर हनुमान गेट बैकुंठ धाम के पास आयोजित कार्यक्रम में बीके रजनी दीदी ने कहा कि शिव और शंकर ने अक्सर लोग समान समझते हैं बल्कि उन दोनों में महान अंतर है। इसी कारण उनकी प्रतिमाएं भी अलग-अलग है। मंदिरों में शंकर की प्रतिमा को एक देहधारी के रूप में दिखाया है जिनके गले में सांप की माला है और जटाओं से गंगा बहती हुई दिखाई हुई है और शिव की प्रतिमा को ज्योर्तिलिंगम के रूप में दिखाया हुआ है जिस पर तीन लकीरें और बीच में बिंदी भी होती है। ज्योतिर्लिंग के ऊपर बनी हुई यह तीन लकीरें उनकी रचना ब्रह्मा, विष्णु, शंकर का प्रतीक है, जिनके द्वारा भी स्थापना, पालन और विनाश का महान कत्र्तव्य करते हैं और बिंदु, परमपिता परमात्मा शिव का वास्तविक स्वरूप है। अक्सर मंदिरों में भी यही देखने में आता है कि हमेशा शंकर जी ज्योतिर्लिंग का ध्यान करते हुए पाए जाते हैं तो कोई खुद का ध्यान भला क्यों ही करेगा इससे सिद्ध होता है कि शिव और शंकर दोनों एक नहीं बल्कि भिन्न है। शिव रचता है और शंकर उनकी रचना है। शिव परमपूज्य है, सर्वश्रेष्ठ है। शिव निराकार है और शंकर सूक्ष्म शरीर वाले हैं। इस अवसर पर शिव ध्वजारोहण भी हुआ और नशा छोडऩे की शपथ दिलाई गई। मुख्य अतिथि महंत चरणदास , पार्षद जयवीर रंगा, नर्सिंग आफिसर भारती प्रजापति ने सभी को शिव जयंती की बधाइयां दी और जिला प्रवक्ता विनोद चावला ने ब्रह्माकुमारी संस्था के कार्यों की सरहाना करते हुए कहा कि यह संस्था लोगों को आंतरिक व आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। इस अवसर पर बीके कमल, मीडिया प्रभारी बीके सुभाष गोयल, बीके पूनम, बीके मोहित, बीके रूद्रांशी, बीके संतोष आदि मौजूद रहे।




