गीता धार्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि जीवन जीने की शैली है: सांसद धर्मबीर सिंह
सांसद ने स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करने का किया आह्वान
भिवानी,(पवन शर्मा): भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा है कि गीता धर्मग्रंथ ही नहीं है, बल्कि जीवन जीने की एक शैली है। गीता को जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है। आत्मसात करने के लिए नागरिकों को कर्म भी करना होगा। सांसद धर्मबीर सिंह शनिवार को स्थानीय किरोड़ीमल पार्क में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के शुभारम्भ अवसर पर बोल रहे थे। इससे पहले उन्होंने हवन यज्ञ में पूर्ण आहूति डालकर जिला स्तरीय गीता महोत्सव का आगाज किया। सांसद ने कार्यक्रम में विभिन्न विभागों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का बारीकी से अवलोकन किया। सांसद ने कहा कि बाहरी तत्वों ने आकर देश में पूरे सिस्टम को तोडऩे का काम किया है और अब कलयुग में अनेक बीमारियां आ गई हैं। इसके परिणामस्वरूप लोग अब स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल की ओर तरफ बढ़ रहे हैं। सांसद ने आह्वान किया कि स्वेदशी वस्तुओं का इस्तेमाल करने का प्रण लें। उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करने लगेंगे तो देश आत्म निर्भर होगा और वर्ष 2047 से पहले विकसित देशों की श्रेणी में आ जाएगा।
गीता महोत्सव का शुभारंभ हवन और गीता पाठ से किया गया। जहर गिरी आश्रम से डॉ. अशोक गिरी के शिष्यों ने शंखनाद किया। आचार्य सुरेश, पंडित इंद्रेश कुमार झा, रामचंद्र शास्त्री, सुयोग्य शास्त्री ने मंत्रोचारण कर हवन करवाया। इस दौरान जोगी वाला डेरे के महंत वेदनाथ और गौमठ्ठ लेघा से महंत राजनाथ का सानिध्य मिला। गोमठ के बच्चों ने योगासन का प्रदर्शन किया। प्रसिद्घ लोक गायक बाली शर्मा व उसकी पार्टी ने कार्यक्रम में महाभारत कालीन रागनियों की प्रस्तुति दी। इसके अलावा डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल, वैश्य मॉडल पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हालुवासिया विद्या विहार, केएम पब्लिक स्कूल, उतमीबाई आर्य कन्या सी.सै. स्कूल, महामति प्राणनाथ विद्या निकेतन स्कूल के विद्यार्थियों ने शानदार प्रस्तुति दी।




