राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण का सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा में इस वर्ष से होगा लागू
नेतृत्व की क्षमता रखने वाली महिला वकीलों के लिए न्याय और समानता का नया सवेरा है ये आदेश: अधिवक्ता मीना जांगड़ा
नेतृत्व की क्षमता रखने वाली महिला वकीलों के लिए न्याय और समानता का नया सवेरा है ये आदेश: अधिवक्ता मीना जांगड़ा
भिवानी,(ब्यूरो): भारत के कानूनी इतिहास में एक नए युग की शुरुआत करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आठ दिसंबर 2025 का देश की सभी राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य करने का फैसला अब हरियाणा में भी इसी वर्ष से लागू होगा। इस महत्वपूर्ण कदम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अधिवक्ता मीना जांगड़ा ने इसे महिला वकीलों के संघर्ष की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 8 दिसंबर 2025 को यह फैसला दिया गया था, जिसमें हरियाणा को शामिल नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा द्वारा यह बात उठाई गई थी कि राज्य बार काउंसिलों के चुनाव के लिए हरियाणा में अधिवक्ताओं की वोटर लिस्ट फाईनल हुई है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज इस फैसले को हरियाणा में लागू करने के आदेश दिए है।
अधिवक्ता मीना जांगड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को भारतीय कानूनी व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होने वाला बताया। उन्होंने कहा कि वर्षो से महिला अधिवक्ता अदालतों में अपनी योग्यता साबित कर रही है, लेकिन नीति-निर्धारक संस्थाओं (बार काउंसिलों) में उनका प्रतिनिधित्व नगण्य रहा है। यह 30 प्रतिशत आरक्षण केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन हजारों महिला वकीलों के लिए न्याय और समानता का नया सवेरा है जो नेतृत्व की क्षमता रखती हैं। अधिवक्ता मीना जांगड़ा ने कहा कि जब निर्णय लेने वाली मेज पर महिलाएं बैठेंगी तो कानूनी पेशे में संवेदनशीलता और जवाबदेही बढ़ेगी। इससे युवा महिला वकीलों को सुरक्षित और समावेशी माहौल मिलेगा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके क्रियान्वयन के लिए एक द्वि-स्तरीय मॉडल अपनाया गया है, जिसमें कुल आरक्षण में से 20 प्रतिात सीटें सीधे चुनाव के माध्यम से महिला अधिवक्ताओं द्वारा भरी जाएंगी तथा शेष 10 प्रतिशत पदों को को-ऑप्शन यानी चयन प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाएगा, ताकि नेतृत्व में अनुभवी महिलाओं की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके। यह नियम न केवल परिषद के सामान्य सदस्यों पर, बल्कि पदाधिकारियों जैसे अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों पर भी लागू होने की उम्मीद है।
गौरतलब होगा कि वर्तमान आंकड़ों के अनुसार देश भर की 18 राज्य बार काउंसिलों के 441 निर्वाचित सदस्यों में से केवल 9 महिलाएं थीं (मात्र 2 प्रतिशत)। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर अंतर को पहचानते हुए संवैधानिक लोकाचार का हवाला दिया। कोर्ट का मानना है कि इस कदम से न केवल लैंगिक समानता आएगी, बल्कि कानूनी निकायों में नए और रचनात्मक विचार भी शामिल होंगे।
फोटो संख्या 16 बीडब्ल्यूएन 3
अधिवक्ता मीना जांगड़ा।




