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“तो नरवणे पद पर क्यों बने रहे?” चीन घुसपैठ विवाद पर बीजेपी विधायक राजेश्वर सिंह के पूर्व सेना प्रमुख से 5 तीखे सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख एमएम नरवणे के 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर लिखे अप्रकाशित ‘संस्मरण’ से कुछ चीजों का जिक्र करने को लेकर संसद में कल काफी हंगामा रहा. हंगामे की वजह से कल संसद की कार्यवाही भी बाधित रही थी. इस विवाद पर पूर्व नौकरशाह और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक राजेश्वर सिंह ने निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर फैसले पद पर रहने के दौरान होते हैं, न रिटायर होने के बाद बयान देकर.

‘तभी इस्तीफा क्यों नहीं दे दिया’

राहुल गांधी की ओर से लोकसभा में पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. सिंह ने देश की ओर से कुछ गंभीर सवाल उठाए. पहला, यही कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर खतरे वास्तव में इतने गंभीर थे, तो जनरल नरवणे ने तब अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया?

साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “यदि उन्हें लगता था कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो वे पद पर बने क्यों रहे?. सबसे अहम सवाल तो यही है कि जब उनके पास पूर्ण संवैधानिक अधिकार और सैन्य कमान थी, तब निर्णायक कार्रवाई करने से उन्हें किसने रोका था? उनका कहना है कि जनरल नरवणे को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

‘रिटायरमेंट के बाद बयान देशहित में नहीं’

बीजेपी विधायक ने कहा, “राष्ट्रीय हित किताबों, इंटरव्यू या रिटायरमेंट के बाद दिए गए बयानों से सुरक्षित नहीं होते. वह उस समय लिए गए फैसलों से सुरक्षित होता है, जब जिम्मेदारी और अधिकार दोनों मौजूद होते हैं.”

उन्होंने यह भी कहा कि सेना और नौकरशाही के हर अधिकारी ने संविधान और देश के प्रति शपथ ली होती है. यदि कोई विषय असल में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा था, तो उस पर कार्रवाई उसी समय होनी चाहिए थी. रिटायरमेंट के बाद बोलना साहस नहीं होता बल्कि सुविधा होती है.”

अपनी भूमिका पर मंथन करें नरवणेः राजेश्वर

नौकरशाह से विधायक बने डॉ. राजेश्वर सिंह ने आगाह करते हुए कहा कि इस प्रकार के चयनित और विलंबित खुलासे संस्थाओं की साख को कमजोर करते हैं, साथ ही जनता के विश्वास को चोट पहुंचाते हैं. उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलने से पहले उन्हें अपने शासनकाल की भूमिका पर मंथन करना चाहिए था.

उन्होंने यह भी कहा कि 26/11 जैसे भीषण आतंकी हमले के बाद कांग्रेस सरकार ने क्या ठोस, निर्णायक और निवारक कार्रवाई की, इसका देश आज भी जवाब चाहता है. उनका कहना है कि इतिहास उन्हें याद रखता है जो कठिन समय में फैसला लेते हैं, न कि उन्हें जो जिम्मेदारी समाप्त होने के बाद बयान देते हैं.

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