रोहतक: भारत रंग महोत्सव का आगाज, मनोज तिवारी और यशपाल शर्मा ने बिखेरी कला की छटा; जानें 12 फरवरी तक का पूरा शेड्यूल

रोहतक: रोहतक की दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विज़ुअल आर्ट्स में सोमवार से चार दिवसीय भारत रंग महोत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया. इस प्रतिष्ठित आयोजन का उद्घाटन भारतीय जनता पार्टी के सांसद एवं प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में किया. कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता यशपाल शर्मा, ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त और रेसलर संग्राम सिंह की मौजूदगी ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया.
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचन: 12 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव का आयोजन नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा किया जा रहा है. महोत्सव के दौरान देश-विदेश से आई रंगमंच टीमें विभिन्न शैलियों और प्रदर्शन रूपों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुतियां देंगी. इस मंच पर कई ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे दर्शकों को विविध संस्कृतियों और रंगमंचीय विधाओं का अनुभव मिलेगा.
मनोज तिवारी का सांस्कृतिक संदेश: उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मनोज तिवारी ने भोजपुरी गीतों की कुछ पंक्तियां भी सुनाईं. उन्होंने कहा कि जैसे हरियाणा में दादा लख्मी चंद की लेखनी और लोकगीत प्रसिद्ध हैं, वैसे ही बिहार के पुराने लोकगीत आज विश्व स्तर पर पहचान बना रहे हैं.” उन्होंने अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक कला के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि, “भारत रंग महोत्सव कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतरीन अवसर देता है.” इस दौरान उन्होंने भोजपुरी गीत ‘ही ही ही हंस देले रिंकिया के पापा’ का अर्थ बताते हुए दांपत्य जीवन में मुस्कान और समझदारी का संदेश दिया.
यशपाल शर्मा की कला और समाज पर राय: बॉलीवुड अभिनेता यशपाल शर्मा ने रोहतक में भारत रंग महोत्सव के आयोजन को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने इसे एक ऐसे मेले की संज्ञा दी, जहां कला के साथ-साथ फिल्म, राजनीति और खेल जगत के लोग भी एक मंच पर जुट रहे हैं. उन्होंने कहा कि, “हरियाणा का गीत-संगीत देशभर में लोकप्रिय हो रहा है और प्रदेश सरकार हरियाणवी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित कर रही है.” साथ ही उन्होंने समाज में सकारात्मक सोच और गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले गानों पर प्रतिबंध को जरूरी कदम बताया.



