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Murshidabad Violence: मुर्शिदाबाद हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, UAPA को लेकर NIA से मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कहा कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार हो रही हिंसा और अशांति से जुड़े एक मामले में आतंकी गतिविधियों से जुड़े UAPA के प्रावधानों को लागू करने को सही ठहराते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में एक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट फाइल करे.

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से की गई अपील का निपटारा करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने राज्य सरकार से मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में NIA जांच के खिलाफ अपनी शिकायतों के साथ कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को भी कहा.

हाई कोर्ट फैसले की चुनौती की जांच कर सकेगाः SC

देश की शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान यह कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट इस मामले में NIA जांच का आदेश देने के केंद्र के फैसले को राज्य सरकार की चुनौती की भी जांच कर सकता है.

इससे पहले 20 जनवरी को, हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार भड़क रही हिंसा और अशांति की घटनाओं पर चिंता जताई और पुलिस तथा प्रशासन को वहां शांति बनाए रखने का निर्देश दिया. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की अगुवाई वाली एक डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी बुला सकती है.

 

हाई कोर्ट में 2 जनहित याचिका दाखिल

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार NIA से जांच कराने का फैसला करने के लिए राज्य सरकार की रिपोर्ट देखेगी. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस मामले में NIA जांच का आदेश दिया था.

 

कलकत्ता हाई कोर्ट में 2 जनहित याचिका दायर की गईं, जिनमें मांग की गई थी कि मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए, क्योंकि पड़ोसी राज्यों में प्रवासी मजदूरों पर कथित हमलों के सिलसिले में वहां हिंसा हुई थी.

 

इससे पहले 16 जनवरी को, झारखंड में बेलडांगा के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर की कथित मौत को लेकर प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे 12 को करीब छह घंटे तक जाम कर रखा था. अगले दिन 17 जनवरी की सुबह भी, बिहार में मुर्शिदाबाद के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर के साथ कथित तौर पर बदसलूकी को लेकर सड़क और रेल जाम कर दिया गया था.

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