मध्यप्रदेश

Rewa Ravan Statue Controversy: रीवा में रावण की मूर्ति पर छिड़ा संग्राम, ‘अशुभ’ बताकर तोड़ने की मांग पर अड़े लोग

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के त्योंथर में स्थित लगभग 60 साल पुरानी रावण की प्रतिमा को लेकर इन दिनों विवाद गहराता जा रहा है. ये प्रतिमा शासकीय अस्पताल के सामने ‘रावणा मैदान’ में स्थापित है. इस मैदान में वर्षों से रामलीला का मंचन होता है. लेकिन अब रावण की प्रतिमा को लेकर गांव दो गुटों में बंट गया है.

रावणा मैदान में स्थापित प्रतिमा को एक पक्ष इसे अशुभ और वास्तुदोष का कारण मानते हुए हटाने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे सांस्कृतिक पहचान के रूप में संरक्षित रखना चाहता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह प्रतिमा कई दशक पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक अधिकारी ने ग्रामीणों के सहयोग से स्थापित कराई थी. समय बीतने के साथ यह प्रतिमा क्षेत्र की पहचान बन गई और मैदान का नाम भी रावणा मैदान पड़ गया. लेकिन धीरे-धीरे गांव में किसी भी बीमारी, दुर्घटना या विकास कार्य में रुकावट जैसी घटनाओं का कारण इस प्रतिमा को माना जाने लगा. कुछ लोगों में यह धारणा बन गई कि प्रतिमा के कारण वास्तुदोष उत्पन्न हो रहा है और इसे हटाने से क्षेत्र की समस्याएं दूर हो जाएंगी.

‘रावण की प्रतिमा होना शुभ नहीं’

प्रतिमा हटाने की मांग करने वाले पक्ष के सौरव द्विवेदी और रजनीश पांडेय का कहना है कि अस्पताल के सामने रावण की प्रतिमा होना शुभ नहीं है. उनका दावा है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है और क्षेत्र में बीमारियां तथा विकास बाधित होता है. वे प्रशासन से प्रतिमा को हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थापित करने या पूरी तरह हटाने की मांग कर रहे हैं.

‘रावण शास्त्रों के ज्ञाता’

वहीं प्रतिमा का समर्थन करने वाले पक्ष के शिवेंद्र शुक्ला और व्यापारी जगदीश पटेल इस तर्क को अंधविश्वास बताते हैं. उनका कहना है कि रावण को केवल खलनायक के रूप में देखना उचित नहीं है. वे उसे महान विद्वान, शिवभक्त और शास्त्रों के ज्ञाता के रूप में मानते हैं. उनका कहना है कि प्रतिमा दशकों से यहां है और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है, इसलिए इसे हटाना परंपरा और इतिहास के साथ अन्याय होगा.

 

गांव में इस मुद्दे को लेकर कई बार बैठकों और चर्चा का दौर भी चल चुका है, लेकिन अब तक कोई सर्वसम्मत समाधान नहीं निकल पाया है. कुछ लोग धार्मिक मान्यताओं और वास्तु तर्कों के आधार पर प्रतिमा हटाने पर अड़े हैं, जबकि अन्य इसे विरासत मानकर संरक्षित रखना चाहते हैं. फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और दोनों पक्षों से संवाद कर समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है.

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