ईरान पर हमला टला या टाल रहे ट्रंप? धमकी के बीच सवाल उठे

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. जहां ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़ रहा है और मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान को धमकी दे रहे हैं. अब सामने आया है कि ईरान पर हमला करने में ट्रंप क्यों देरी कर रहे हैं. अब सामने आया है कि कई खाड़ी देश और इजराइल ट्रंप को ईरान पर हमला करने से रोक रहे हैं.
खाड़ी देशों ने ट्रंप से की बातचीत
वरिष्ठ सऊदी अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब, कतर और ओमान ने मिलकर काफी समय तक कूटनीतिक कोशिशें कीं. इन देशों का मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह समझाना था कि ईरान को थोड़ा समय दिया जाना चाहिए, ताकि वो विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई के बावजूद संयम दिखा सके.
अधिकारियों ने बताया कि इन तीनों खाड़ी देशों ने लगातार बातचीत, संदेशों और संपर्कों के जरिए अमेरिका को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि फिलहाल सैन्य कार्रवाई की जगह बातचीत और कूटनीति को मौका देना बेहतर होगा. समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, यही वजह रही कि ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई को टालने का फैसला किया.
दोनों देशों के बीच बढ़ गया तनाव
एक सऊदी अधिकारी ने एएफपी को बताया कि हमने आखिरी समय में बहुत तेज और लगातार कूटनीतिक कोशिशें कीं, ताकि राष्ट्रपति ट्रंप को यह समझाया जा सके कि ईरान को मौका दिया जाए.
यह कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय में हुईं, जब टकराव की आशंका बहुत बढ़ गई थी. हालात इतने ज्यादा तनावपूर्ण हो गए थे कि अमेरिका ने कतर के अल-उदीद एयर बेस से अपने कुछ कर्मचारियों को अस्थायी रूप से हटा लिया था. वहीं, सऊदी अरब और कुवैत में मौजूद अमेरिकी दूतावासों ने भी अपने स्टाफ को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी.
अमेरिका दे रहा ईरान को चेतावनी
व्हाइट हाउस लगातार ईरान को चेतावनी दे रहा है कि अगर ईरान हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है. खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त शब्दों में चेतावनी दी थी. उन्होंने लिखा था, मदद रास्ते में है, और कहा था कि अगर हत्याएं जारी रहीं तो इसके गंभीर नतीजे होंगे.
लेकिन, कई दिनों तक धमकियों के बाद ट्रंप ने अचानक अपना रुख बदल लिया. उन्होंने कहा कि उन्हें दूसरी तरफ से बहुत अहम स्रोतों से भरोसा मिला है कि अब फांसी नहीं दी जाएगी.
नेतन्याहू ने भी ट्रंप से की बात
साथ ही यह भी सामने आया है कि नेतन्याहू भी ट्रंप से संयम बरतने के लिए कह रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने बुधवार रात ट्रंप से बात की और उनसे ईरान पर किसी भी हमले को टालने का अनुरोध किया. हालांकि, उनके कार्यालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.
पिछले कुछ दिनों में नेतन्याहू ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी कई बार बात की और ट्रंप से सीधे उस समय संपर्क किया, जब राष्ट्रपति ने यह घोषणा की कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुक गई हैं.
खाड़ी देशों के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने तेहरान को भी साफ संदेश दिया. एक खाड़ी अधिकारी के मुताबिक, ईरान को कहा गया कि अगर उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, तो इसका असर क्षेत्र के देशों के साथ उसके रिश्तों पर पड़ेगा.
बातचीत अब भी जारी
एक सऊदी अधिकारी ने कहा कि इस पूरी कूटनीतिक कोशिश का मकसद हालात को बेकाबू होने से रोकना था. उन्होंने कहा, यह पूरी रात जागकर हालात को और बिगड़ने से रोकने की कोशिश थी. भरोसे को मजबूत करने के लिए बातचीत अब भी जारी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हफ्ते अपने सऊदी समकक्ष से कहा कि ईरान किसी भी विदेशी खतरे के खिलाफ अपना बचाव करेगा.
इस बीच, यूएन के अधिकारियों ने भी संयम बरतने की अपील की. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने चेतावनी दी कि ईरान पर सैन्य हमला पहले से ही बेहद संवेदनशील हालात को और ज्यादा अस्थिर कर देगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए.




