ज़मीन के नीचे से आ रहा ज़हरीला पानी, रगों में घुल रहा ज़हर

भिवानी। जिले के पांच खंड तोशाम, कैरू, सिवानी, लोहारू और बहल क्षेत्र के करीब 170 गांवों का भूमिगत जल पाताल में पहुंच गया है। यही वजह है कि 800 से 900 फीट गहराई में भूमिगत जल दोहन के लिए लगाए गए बोरवेल रासायनिक तत्व उगल रहे हैं जिनसे कैंसर का खतरा भी बढ़ रहा है। भूमिगत जल की विद्युत चालकता (ईसी) 6000 के पार पहुंच गई है वहीं टीडीएस, हार्डनेस और फ्लोराइड की मात्रा भी सामान्य से तीन गुना तक आंकी जा रही है।
जिले के खंड तोशाम, लोहारू, सिवानी, बहल और कैरू का भूमिगत जल पीने योग्य नहीं है। ये खंड डेंजर जोन में आ गए हैं यानी भूमिगत पानी एक हजार फीट की गहराई पर पहुंचने से यह पीने योग्य श्रेणी में नहीं आता। यहां भूमिगत पानी में टीडीएस, हार्डनेस और फ्लोराइड की मात्रा सामान्य से तीन गुना तक ज्यादा आंकी गई है। विद्युत चालकता भी 6000 के पार दर्ज की गई है जबकि सामान्य ईसी 2000 तक ही पानी को पीने योग्य माना जाता है।
भूमिगत पानी में पीपीएम 200 से 400 होना चाहिए जबकि जिले में कई स्थानों पर पीपीएम की मात्रा 600 तक दर्ज की गई है। इस कारण भूमिगत जल खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। लोहारू क्षेत्र के पानी का टीडीएस संतुलित नहीं है और अधिकतर रासायनिक तत्वों की मात्रा खतरनाक रूप से बढ़ रही है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
कैंसर के साथ हड्डियों को कमजोर करने और बाल झड़ने के लिए भी पानी जिम्मेदार
बोरवेल उगल रहे जहरीला पानी, पीने में भी स्वाद बिगड़ा
ट्यूबवेल के पानी का प्रयोग फसल में करते हैं तो वह पनपने के बजाय झुलस रही है। लैब में टेस्ट कराने से पता चला कि यह पानी न केवल रासायनिक तत्वों की वजह से नमकीन हो चुका है बल्कि पीने लायक भी बिल्कुल नहीं है। इलाके के कई ट्यूबवेल अब खराब भी हो चुके हैं जिनका इस्तेमाल किसानों ने बंद कर दिया है।
भूमिगत जलस्तर काफी नीचे जाने से ट्यूबवेल का खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में जो पानी ट्यूबवेल उगल रहे हैं वह भी मानकों के हिसाब से सही नहीं है। अधिकांश किसान खेती को बचाने के लिए जमीन का सीना चीरकर एक हजार फीट गहराई से पानी निकालने पर मजबूर हैं मगर भूमिगत जलस्तर चिंताजनक स्थिति में पहुंच चुका है। मजबूरी में यही पानी किसान का परिवार भी पीने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
भिवानी जिले के लगभग सभी सात खंडों में भूमिगत जल पीने लायक नहीं है। लोहारू, बहल, सिवानी, तोशाम, कैरू क्षेत्र में तो भूमिगत जल की विद्युत चालकता छह हजार के पार पहुंच गई है। यह पानी पीने से गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। हालांकि रेतीली भूमि में यह पानी कुछ किसान फसलों में इस्तेमाल कर रहे हैं मगर सेमग्रस्त इलाकों के भूमिगत जल में रासायनिक तत्वों का समीकरण भी बिगड़ चुका है।
भूमिगत जलस्तर में रासायनिक तत्वों का संतुलन काफी बिगड़ गया है। यह पानी पीने लायक बिल्कुल नहीं है। इसके सेवन से शरीर में हड्डियां कमजोर होने, बाल झड़ने के साथ-साथ कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ रहा है।




