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नवरात्रि पर छोटी काशी भिवानी में सजे माता के मंदिर पंडित हनुमान प्रसाद ओजस्वी बोले 8 दिन रखे जाएंगे व्रत

नवरात्रि पर महिलाओं ने खरीदी माता की श्रृंगार व पूजा सामग्री

भिवानी, (सोमवीर शर्मा): चैत्र नवरात्रि जोकि 30 मार्च रविवार से आरंभ हो रहे हैं। इन नवरात्रों को लेकर छोटी काशी भिवानी के शहर के भोजवाली देवी मंदिर, लाईन पार दुर्गा मंदिर, देवसर धाम, लोहारी की पहाड़ी माता मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया है। इन मंदिरों में नवरात्रों में भारी संख्या में भक्तजन एवं श्रद्धालु मां की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अखंड ज्योत जलाई जाती है। नवरात्र के प्रारंभ होने से एक दिन पूर्व शनिवार को श्रद्धालुओं ने पूजा सामग्री की खरीददारी की। शहर के विभिन्न बाजारों में पूजा सामग्री की दुकानें भी लगी हुई थी। नवरात्र व्रत करने वाले श्रद्धालुओं के लिए खाद्य सामग्री भी विभिन्न कंपनियों द्वारा मार्केट में उतारी हुई है। पंडित हनुमान प्रसाद ओजस्वी ने बताया कि नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। सर्वार्थ सिद्धि, ऐंद्र समेत अन्य शुभ योग में नवरात्रि शुरू होगी। इस बार चैत्र नवरात्रि में 9 नहीं 8 ही व्रत रखे जाएंगे, क्योंकि तृतीया तिथि का क्षय हो रहा है। नवरात्रि के पावन अवसर पर लोग मां दुर्गा की पूजा और कलश स्थापना करते हैं। चूंकि नवरात्रि के दौरान माता के पूजन को लेकर रूई/बत्ती, धूप, घी और दीपक, फूल, दूर्वा, पंच पल्लव, 5 तरह के फल, पान का पत्ता, लौंग, इलायची, अक्षत, सुपारी, नारियल, पंचमेवा, जायफल, जौ, कलावा, माता की लाल चुनरी, माता के लाल वस्त्र, माता की तस्वीर या अष्टधातु की मूर्ति, माता के शृंगार का सामान, लाल रंग का आसन, मिट्टी का बर्तन, हवन कुंड आदि सामग्री की जरूर होती है।
माता के 16 शृंगार में प्रयोग की जाती है
नवरात्रि के दौरान माता का शृंगार किया जाता है। मान्यता है कि व्रती महिलाएं माता का शृंगार करके अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त कर सकती हैं। माता के शृंगार के लिए इन सामग्रियों की आवश्यकता होती है-
सिंदूर, मांग टीका, गजरा, लाल बिंदी, काजल, झुमकी, गले का हार, नथ, चूडिय़ां, बाजूबंद, मेहंदी, कमर बंद, लाल चुनरी, लाल रंग के वस्त्र, बिछुआ, इत्र आदि का प्रयोग करने से मां हर मनोकामना पूरी करती हैं मां दुर्गाचैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना भी की जाती है। घटस्थापना सुबह 10.30 बजे से 12.00 बजे के बीच न करें। अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है। चैत्र नवरात्रि का त्योहार वसंत ऋतु में आता है। मां के नौ स्वरूपों की सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से मनोकामना पूरी होती है।

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