मुरादाबाद: अब ‘लोहे’ से चमकेगी पीतल नगरी की किस्मत, कम बजट वाले होम डेकोर आइटम्स की बढ़ी मांग

उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से जाना जाता है. मुरादाबाद में पीतल के उद्योग की चर्चा पूरे विश्व में की जाती है, लेकिन इस समय कई देशों में चल रहे युद्ध के कारण मुरादाबाद में रॉ-मटेरियल (सिली) के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, और विदेश से ऑर्डर भी नहीं आ रहे हैं. इसका असर भी मार्केट में दिखने लगा है.यही वजह है कि पीतल का उपयोग करने वाले व्यापारियों के सामने कई सारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं.
बरस एक्सपोर्ट धीरे-धीरे घट रहा है, इसके साथ ही देश में बिकने वाले देसी आइटम की बिक्री में भी भारी गिरावट आई है. पीतल नगरी के कारीगरों के द्वारा कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिससे एक बार फिर से कारीगरों को रोजगार मिलने की उम्मीद जग गई है. पीतल आइटम बनने वाले कई सारे डेकोरेटिव आइटमों को अब लोहे में तैयार किया जा रहा है. आयरन में तैयार होने वाले आइटम की कीमत पीतल के मुकाबले बेहद कम है.
क्या बोले पीतल व्यापारी?
मुरादाबाद जिले में बहुत लंबे समय से पीतल का उद्योग करने वाले मोहम्मद उबेद ने बताया कि अगर कोई भी चीज पीतल की तैयार करते हैं तो उसकी कीमत हजार रुपए किलो बैठती है, लेकिन लोहे का इस्तेमाल करने पर वही चीज लगभग ₹300 किलो में तैयार हो जाती है. मोहम्मद उबेद ने कहा कि कोई भी आइटम अगर हजार रुपए का पीतल में तैयार होता है तो वही आइटम लोहे में ₹300 में तैयार हो रहा है.
पीतल की शीट की बात करें तो उसकी कीमत हजार रुपए प्रति केजी है. वहीं लोहे की शीट 100 रुपए के अंदर ही मिल जाती है. सस्ते और डेकोरेटिव लोहे के आइटमों की डिमांड देशभर में अलग-अलग स्थान से आ रही है. लोहे के डेकोरेटिव आइटम में सैकड़ों की संख्या में प्रोडक्ट हैं, जिन्हें लोग पूरे देश में पसंद कर रहे हैं. डेकोरेटिव आइटमों की डिमांड विदेश से भी आ रही है.
क्यों आयरन से जुड़ रहे कारोबारी?
मुरादाबाद में अब पीतल कारोबारी नए आयरन कारोबार से जुड़ रहे हैं जिससे आने वाले समय में व्यापारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है. मुरादाबाद के पीतल के व्यापारियों का साफ तौर से कहना है कि लगातार महंगाई से उनके व्यापार पर फर्क पड़ा है लेकिन उन्हें सरकार व प्रशासन से उम्मीद है कि वह उनकी हर संभव मदद करेगी.




