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वोटरों को प्रताड़ित करने का आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पांचवां पत्र भेजा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है. SIR के माहौल में मुख्यमंत्री द्वारा इस संबंध में लिखा गया यह पांचवां पत्र है. ममता ने एक बार फिर आम जनता को परेशान किए जाने का आरोप लगाया है और उन्होंने कई समस्याओं का जिक्र भी किया है.

ममता ने शनिवार को ज्ञानेश कुमार को चौथा पत्र भेजा था. तीन पन्नों के इस पत्र में उन्होंने कई सवाल पूछे थे. अमर्त्य सेन, जय गोस्वामी, मोहम्मद शमी और देव को सुनवाई के नोटिस क्यों भेजे गए? 77 लोगों की मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा? जैसे सवाल उठाए थे. अब ममता का दावा है कि मतदाताओं द्वारा पात्रता साबित करने के लिए उचित दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा है.

सीएम बोलीं- जमा दस्तावेजों की रसीद नहीं दी जा रही

पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा कि मतदाता अपनी पात्रता के सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में जमा किए गए दस्तावेजों की कोई उचित रसीद या स्वीकृति नहीं दी जा रही है. बाद में, इन दस्तावेजों को ‘नहीं मिला’ या ‘रिकॉर्ड में नहीं’ बताया जा रहा है. मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस तरह मतदाताओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने आम जनता के साथ हो रही इस तरह की बदसलूकी को रोकने की अपील की.

‘सुनवाई के लिए बुलाकर परेशान किया जा रहा है’

ममता ने यह सवाल भी उठाया कि माता-पिता और बच्चे की उम्र में 18-19 साल का अंतर होने पर ही सुनवाई के लिए बुलाकर बच्चे को क्यों परेशान किया जा रहा है. मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे अपने आखिरी पत्र में ममता ने लिखा कि जिन मतदाताओं के लिए सुनवाई का नोटिस जारी किया गया है, उन सभी का नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज कर लिया गया है, इसलिए ऐसे मामलों में सुनवाई का नोटिस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

अपने ही सुधारों की अनदेखी कर रहा EC- सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग अपने ही पिछले 20 सालों के वैधानिक सुधारों की अनदेखी कर रहा है. कभी किसी को तो कभी किसी को सुनवाई के लिए बुला ले रहा है. लोगों के पास कागजात मौजूद हैं फिर उन्हें आयोग की तरफ से जानबूझकर परेशान किया जा रहा है.

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