Kashi World Record: काशी में ‘आनंद-कानन’ का पुनर्जन्म, 20 हजार लोगों ने 30 मिनट में रोप दिए 3 लाख पौधे; गिनीज बुक में नाम दर्ज

धर्म और संस्कृति की नगरी काशी, जिसे पौराणिक काल में ‘आनंद-कानन’ (खुशियों का वन) कहा जाता था, अब एक बार फिर अपने उसी वैभवशाली स्वरूप की ओर लौट रही है. गंगा के तट पर बसे सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में वाराणसी नगर निगम ने एक ऐसा ऐतिहासिक पौधारोपण अभियान चलाया है जिसने विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. इस महाभियान में काशी के जन-जन ने अपनी अटूट आस्था और पर्यावरण के प्रति प्रेम का परिचय दिया. करीब 20 हजार से ज्यादा लोगों ने एकजुट होकर मात्र 30 मिनट के भीतर 3 लाख से अधिक पौधे रोपित किए. इस गौरवशाली उपलब्धि ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है.
यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व में गोद लिए गए गांव डोमरी के समीप 350 बीघा क्षेत्र में चलाया जा रहा है. इसे एक विशाल शहरी वन (Urban Forest) के रूप में विकसित किया जा रहा है. जापानी मियावाकी तकनीक के प्रयोग से यह वन सामान्य की तुलना में 10 गुना तेजी से बढ़ेगा और 30 गुना ज्यादा घना होगा. यह वन आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध ऑक्सीजन बैंक के रूप में कार्य करेगा और गंगा तटों के कटाव को रोकने में भी मजबूती प्रदान करेगा.
नगर निगम को होगी करोड़ों की आय
वाराणसी के महापौर अशोक कुमार तिवारी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि आर्थिक स्वावलंबन का भी एक अनोखा मॉडल बनेगा. इसके लिए मध्य प्रदेश की MBK संस्था के साथ समझौता (MoU) किया गया है. परियोजना के तीसरे वर्ष से ही निगम को 2 करोड़ रुपये की आय होने लगेगी. पांचवें वर्ष में 5 करोड़ और सातवें वर्ष तक यह वार्षिक आय 7 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
फल, फूल और आयुर्वेद का संगम
यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि एक पूर्ण आत्मनिर्भर इको-सिस्टम होगा. यहां मियावाकी वन के साथ-साथ निम्नलिखित का अद्भुत समन्वय दिखेगा. फलों के बाग आम, अमरूद, पपीता और अनार जैसे फलदार पेड़. अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधे, जो शहर की आबोहवा को औषधीय गुणों से युक्त बनाएंगे. यही नहीं यहां, गुलाब, चमेली और पारिजात के फूलों की व्यावसायिक खेती भी होगी.
भीषण गर्मी के लिए वॉटर मैनेजमेंट
पौधों को जीवित रखने और उनके संरक्षण के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. सिंचाई के लिए 5 बोरवेल स्थापित किए जा चुके हैं. मार्च से जून की प्रचंड गर्मी के लिए विशेष शेड्यूल बनाया गया है, जिसके तहत सप्ताह में तीन बार 45-45 मिनट की गहन सिंचाई की जाएगी. देशी प्रजातियों को प्राथमिकता- इस वन में महुआ, कचनार, हरसिंगार, शीशम और अर्जुन जैसी 27 प्रकार की देशी प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं, जो अस्थायी जलभराव को सहने में सक्षम हैं.
पौधे के प्रकार, नाम और संख्या
1. छायादार और वन प्रजातियां- शीशम: 35,171, सागौन: 14,371, अर्जुन: 13,671, सप्तपर्णी: 13,071, बाँस: 12,371, पीपल: 11,421, महुआ: 10,771, शीशम (हाइब्रिड): 14,071, महोगनी: 11,021, बकैन: 9,971, चिलबिल: 8,371, कैजुराइना/झाऊ: 7,371, चितवन: 6,071,
2. फलदार वृक्ष- अमरूद: 24,121, आम: 19,421, अनार: 14,771, शहतूत: 12,771, नींबू: 10,371, करौंदा: 8,071, बेल: 3,971
3. फूलों वाले और सजावटी पौधे- कचनार: 11,771, चाँदनी: 9,371, गुड़हल: 9,071, हरसिंगार/पारिजात: 7,771, बोतल ब्रश: 7,071, मनोकामिनी: 6,371, एलिका: 4,821, जंगल जलेबी: 7,022




