भिवानी। शहर की अवैध कॉलोनियों के बुने जाल में विकास पूरी तरह उलझता नजर आ रहा है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने शहर के चारों तरफ स्थित 24 यूसी (अनधिकृत कॉलोनियों) को अधिकृत करने के मसौदे पर एक बार फिर आपत्ति लगाते हुए फाइल नगर परिषद को वापस लौटा दी है। यह पहला मौका नहीं है बल्कि अब तक सात से आठ बार फाइल आपत्तियों के साथ लौटाई जा चुकी है। शहर के चारों तरफ अनधिकृत रूप से विकसित हो चुकी कॉलोनियों का बड़ा इलाका अब जनसुविधाओं की मांग कर रहा है जबकि इन रिहायशी इलाकों के बीच मौजूद खेत अधिकृत होने में बड़ी अड़चन बने हुए हैं।
अवैध कॉलोनाइजर राजनीतिक संरक्षण में बिना किसी रोकटोक और प्रशासनिक अड़चनों के लगातार अवैध कॉलोनियां काटकर प्लाॅट बेचने में जुटे हैं। इसी बीच एक राजनेता की अवैध कॉलोनी पर बुलडोजर चलाने वाले जिला नगर योजनाकार का अचानक तबादला भी हो गया। भिवानी नगर परिषद पिछले करीब चार वर्षों से शहरी दायरे को बढ़वाने के लिए अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कराने के प्रयास कर रही है लेकिन शहर का दायरा चारों तरफ अवैध कॉलोनियों से घिरा हुआ है। इन कॉलोनियों को बिना पंजीकृत कॉलोनाइजरों ने अपने फायदे के लिए कृषि भूमि पर प्लाॅट काटकर लोगों को जनसुविधाओं के सब्जबाग दिखाते हुए बेच दिया। अब यही कॉलोनियां नगर परिषद की हदबंदी और अनधिकृत कॉलोनियों के बीच लक्ष्मण रेखा बन गई हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा कॉलोनियों को अधिकृत किए जाने के नए नियम भी अधिकारियों के लिए उलझन बने हुए हैं। ऐसे में नगर परिषद भिवानी 24 अनधिकृत कॉलोनियों के करीब 400 एकड़ क्षेत्र को शहरी दायरे में शामिल कराने के लिए कई बार शहरी स्थानीय निकाय विभाग को मसौदा भेज चुकी है लेकिन हर बार उस पर आपत्ति लगाकर लौटा दिया गया। अब एक बार फिर नगर परिषद अधिकारी अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कर शहरी दायरा बढ़वाने की कोशिश में हैं जहां पहले ही अवैध कॉलोनाइजर प्लाॅट बेच चुके हैं। हालांकि इन अनधिकृत कॉलोनियों के अंदर राजस्व विभाग द्वारा भूमि का वसीका पंजीकरण बंद किया हुआ है। ऐसे में अधिकांश लोग एग्रीमेंट के आधार पर ही अपने सपनों का घर बनाकर मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे हैं।
1967 में पहली बार बढ़ा था भिवानी शहर का दायरा
भिवानी शहर का दायरा पहली बार वर्ष 1967 में बढ़ाया गया था। इसके बाद आसपास के गांवों की सीमाओं तक अवैध कॉलोनियां फैल चुकी हैं जिन्हें अब अधिकृत कराने की पुरजोर कोशिश चल रही है। 15 फरवरी 1977 को दूसरी बार शहरी दायरा बढ़ाने का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया जिसे 31 मार्च 1977 से लागू किया गया था। इसी तरह वर्ष 2004 में शहर की 41 अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कराया गया। इसके बाद वर्ष 2018 में भी शहर का दायरा बढ़ाया गया। नियमों के अनुसार किसी भी रिहायशी कॉलोनी को अधिकृत किए जाने के लिए उसमें 50 प्रतिशत क्षेत्र का आवासीय होना अनिवार्य है।
शहर के इन इलाकों में तेजी से विकसित हुई हैं अनधिकृत कॉलोनियां
शहर के तोशाम रोड पर टीआईटी खेल ग्राउंड जागृति कॉलोनी जूई नहर के पास चार-चार एकड़ में दो अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। इसी तरह बापोड़ा रोड पर भी अनधिकृत कॉलोनियों में प्लाॅट बेचे जा रहे हैं। हांसी रोड तिगड़ाना मोड़, राजपुरा माइनर के पास कृषि भूमि पर अवैध प्लाॅट काटकर बिक्री की जा रही है। तिगड़ाना मोड़ रिंग रोड के आसपास भी अवैध प्लाॅट काटे जा चुके हैं। जिला कारागार के आसपास भी अवैध प्लाॅटों की नींव भरी जा चुकी है। कोंट रोड, ढाणा रोड और त्रिवेणी के समीप भी अवैध प्लाॅट आसपास के गांवों की हद तक पहुंच गए हैं। इसके अलावा अधिकृत कॉलोनियों के आसपास खेतों में भी तेजी से प्लाॅट काटे जा रहे हैं।
एक माह में 20 एकड़ में चला था पीला पंजा, अब तबादले की गिरी गाज
भूमाफिया और राजनीतिक संरक्षण में अनधिकृत कॉलोनियों का धंधा लगातार फल-फूल रहा है। इसी बीच जनवरी माह में भिवानी, बवानीखेड़ा और सिवानी क्षेत्र में करीब 20 एकड़ में काटी गई अवैध कॉलोनियों पर पीला पंजा चलाने वाले जिला नगर योजनाकार नवीन कुमार का तबादला कर दिया गया। फिलहाल नए डीटीपी ने अभी कार्यभार नहीं संभाला है। एक माह के भीतर डीटीपी की ओर से अवैध कॉलोनियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई थी लेकिन अब दोबारा इन कॉलोनियों में मकान निर्माण, प्लाटों की नींव और सड़क निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। इसके बाद अवैध रूप से प्लाॅटों की बिक्री भी धड़ल्ले से की जा रही है।
शहर के चारों तरफ नगर परिषद की हद बढ़ाने के लिए 24 अनधिकृत कॉलोनियों का मसौदा शहरी स्थानीय निकाय मुख्यालय द्वारा आपत्ति लगाकर वापस भेजा गया है। फिलहाल इसे दुरुस्त किया जा रहा है और जल्द ही फिर से मुख्यालय को भेजा जाएगा। मुख्यालय ने कुछ रिहायशी कॉलोनियों के आसपास खाली भूमि यानी कृषि भूमि होने का हवाला देकर आपत्तियां दर्ज की हैं। शहर की 24 अनधिकृत कॉलोनियों को अधिकृत कराने के बाद करीब 400 एकड़ का अधिकृत दायरा और बढ़ जाएगा, जिसके बाद लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।