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सड़क सुरक्षा समिति के आदेश बेअसर: समाधान शिविर में उठा मुद्दा, टूटी सड़क अब भी अधूरी

भिवानी। धुंध का मौसम गहराने से पहले ही सड़क पर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए सड़क सुरक्षा समिति के आदेशों को संबंधित विभागों के अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं। समाधान शिविर में भी टूटी सड़कों और धंस रहे मुख्य मार्गों का मामला उठ चुका है लेकिन इसके बावजूद अधिकारी कोई संज्ञान नहीं ले रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी है जिससे आम नागरिक परेशान हैं।

शहर का सर्कुलर रोड बार-बार धंस रहा है मगर अधिकारी केवल मलबा डालकर सड़क समतल कराने में लगे हैं। सड़क धंसने की वजह की जांच नहीं हुई और न ही कोई स्थायी समाधान निकाला गया है। पीडब्ल्यूडी पिछले सात वर्षों में 35 लाख रुपये से अधिक का बजट केवल सड़क के छोटे हिस्से को दुरुस्त कराने में खर्च कर चुका है लेकिन नतीजा शून्य है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अपनी लाइनों की जांच कराने तक की जहमत नहीं उठा रहा है।

घंटाघर शनि मंदिर के सामने सर्कुलर रोड धंसने के हिस्से में मुख्य सीवर लाइन न होने का दावा जनस्वास्थ्य विभाग ने किया है जबकि दिनोद गेट पेट्रोल पंप के सामने मुख्य सीवर लाइन का मैनहोल क्षतिग्रस्त है। पहले नया सीवर मैनहोल बनाया गया था जो अब क्षतिग्रस्त होकर सड़क धंसने का कारण बन गया है। पीडब्ल्यूडी और जनस्वास्थ्य विभाग आमने-सामने हैं। सड़क सुरक्षा समिति ने शहर के अन्य मुख्य मार्गों को हादसा संभावित बिंदु से मुक्त कराने के निर्देश दिए हैं लेकिन व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।

शहर में कई जगह खोदी गई सड़क बने हादसा स्पॉट

जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने पानी की लाइनों की लीकेज ठीक करने के लिए कई जगह सड़क तोड़ डाली। अब वहां गहरे गड्ढों पर मिट्टी भरी गई है लेकिन गड्ढे अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। धुंध के दौरान रात में हादसों का अंदेशा बना हुआ है। कई मुख्य रास्तों पर गहरे गड्ढे खोदकर मरम्मत का काम चल रहा है।

शहर की सड़कों पर कई जगह गहरे गड्ढे खोदकर छोड़े गए हैं जिनकी वजह से हादसों का अंदेशा है। सड़क पर सुरक्षित यातायात बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन हिदायतें देता है लेकिन धरातल पर असर नहीं दिखाई दे रहा। लोग अपनी सुरक्षा स्वयं संभाल रहे हैं। जरा सी लापरवाही हादसे का कारण बन सकती है।

धुंध का मौसम आने से पहले जिला प्रशासन और पुलिस सड़क सुरक्षा के लिए कई कार्यक्रम चला रहे हैं लेकिन सड़क पर सफर सुरक्षित नहीं है। कुछ वाहन चालक हेलमेट का प्रयोग नहीं करते जो किसी हादसे में जानलेवा साबित हो सकता है। बेहतर सफर के लिए सड़क की स्थिति दुरुस्त होनी जरूरी है।

सड़कों पर संकेतक नहीं हैं या दुकानदार अतिक्रमण के पीछे उन्हें छिपा देते हैं। सफेद पट्टी तक गायब है। ब्रेकर कब आया इसका पता ही नहीं चलता। जरा सी अधिक स्पीड में वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है। सड़कों की हालत ऐसी नहीं कि वाहन स्पीड पकड़े, हर दस कदम पर गड्ढे हैं।

सड़क सुरक्षा समिति में अधिकारी शामिल होते हैं और निर्देश जारी करते हैं लेकिन ये आदेश धरातल पर आने से पहले ही हवा में रह जाते हैं। सर्कुलर रोड की हालत खराब है। सीवर मैनहोल नीचे हैं, गहरे गड्ढे हैं और सड़क धंस रही है। इन समस्याओं का स्थायी निदान आवश्यक है।

संबंधित विभागों के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन की तरफ से हिदायतें दी जा चुकी हैं। सभी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की सख्त हिदायत है कि वे अपने अधीन आने वाले मार्गों पर सभी व्यवस्थाएं समय रहते दुरुस्त कराएं, खासकर दुर्घटना संभावित जगहों पर संकेतक लगाएं और वाहनों के लिए सुरक्षित यातायात का प्रबंध कराएं।

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