घर पर कैसे करें जया एकादशी की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी सामग्री

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है. इन्हीं एकादशियों में जया एकादशी का खास महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है. साल 2026 में जया एकादशी पर कई दुर्लभ संयोग, इंद्र, रवि, भद्रावास और शिववास योग बन रहे हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी, गुरुवार को रखा जाएगा. यह एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है और इसे विजय, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है.
पूजा के श्रेष्ठ मुहूर्त
- सुबह का मुहूर्त: सुबह 7:11 बजे से सुबह 8:32 बजे तक रहेगा.
- दोपहर का मुहूर्त: सुबह 11:14 बजे से दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा.
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर.
- पीले फूल, पीले वस्त्र और पीला चंदन.
- तुलसी दल (सबसे महत्वपूर्ण).
- धूप, दीप (घी का दीपक), और अगरबत्ती.
- फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर).
- अक्षत (बिना टूटे हुए चावल).
- व्रत कथा की पुस्तक.
जया एकादशी पूजा विधि
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. मंदिर के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें. उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं. भगवान को पीला चंदन लगाएं, पीले फूल और वस्त्र अर्पित करें. भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं. याद रखें, विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. घी का दीपक जलाकर जया एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें. आखिर में ओम जय जगदीश हरे की आरती करें. शाम को दीपदान करें और अगले दिन यानी द्वादशी को किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर व्रत का पारण करें.
जया एकादशी का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पाप कट जाते हैं. इसे पिशाच मोचिनी एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि यह बुरी योनियों के भय से मुक्ति दिलाती है. इस दिन मन को शांत रखना, झूठ न बोलना और सात्विक विचार रखना जरूरी होता है.




