हिसार नागरिक अस्पताल: वेंटिलेटर धूल फांक रहे, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी और दवाओं का टोटा; क्या बजट से बदलेगी तस्वीर?

हिसार। नागरिक अस्पताल में बेशक कैंसर डे केयर सेंटर की शुरूआत इस साल के फरवरी माह में शुरू की गई, लेकिन अभी अस्पताल को बर्न, हार्ट और कैंसर स्पेशलिस्ट चिकित्सक नहीं मिल पाया है। ऐसे में बर्न, हार्ट और कैंसर स्पेलिस्ट चिकित्सकों की अभी तक अस्पताल में नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में इन बीमारियों से संबंधित मरीजों को पीजीआई रोहतक और मेडिकल कॉलेज अग्रोहा रैफर किया जाता है।
वहीं, अस्पताल में कोरोना महामारी के दौरान आए 37 वेंटीलेटरों में से दो वेंटीलेटरों का इस्तेमाल किया जा रहा हैं, बाकी एक वेंटीलेटर एक कमरे की शोभा बढ़ा रहे हैं। हालांकि, अस्पताल के सौदर्यीकरण के लिए साढ़े सात करोड़ का बजट पिछले साल आया था।
अस्पताल प्रशासन की तरफ से एयरपोर्ट के सामने राजकीय पशुधन फार्म की जमीन पर ट्रामा सेंटर बनाने के लिए जमीन ट्रांसफर के लिए फाइल को पंचकूला स्थित राजस्व विभाग को भेजा गया है। शहरवासियों को मार्च माह में पेश किए जाने वाले बजट से आस है कि स्वास्थ्य सुविधाओं में बढोतरी होगी।
वेंटिलेटर की नहीं है सुविधा
कोरोना महामारी के दौरान अस्पताल परिसर में 37 वेंटिलेटर आए थे। विडंबना ये है कि इन वेंटिलेटर में दो से तीन वेंटीलेटर का इस्तेमाल हो रहा हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर की कोई सुविधा नहीं हैं। ऐसे में यहां पर आने वाले गंभीर मरीजों को रैफर कर दिया जाता है या फिर स्वजन मरीज को निजी अस्पताल में लेकर चले जाते है।
कैंसर डे-केयर सेंटर की शुरुआत
नागरिक अस्पताल में इस साल फरवरी माह में विश्व कैंसर दिवस पर कैंसर डे केयर सेंटर का शुभारंभ किया गया। यहां पर कैंसर के उन मरीजों को कीमोथैरेपी दी जाएगी जिनका रोहतक पीजीआई में नाम रजिस्टर होगा। पहले मरीज को वहां पर दो कीमोथैरेपी दी जाएगी उसके बाद नागरिक अस्पताल में मरीजों को कीमोथैरेपी दी जाएगी।
आर्यनगर और सातरोड गांव की सीएचसी बदहाल, सातरोड़ में सीएचसी चौपाल में की जा रही संचालित
जिले में आठ सीएचसी और 28 के करीब पीएचसी है। गांव आर्य नगर और सातरोड के अंदर चल रही सीएससी का बुरा हाल है। वर्षा के मौसम में आर्यनगर की सीएचसी में पानी भर जाता है। ऐसे में सीएचसी को गांव की चौपाल में शिफ्ट किया जाता है। इसके अलावा यहां पर एक्स-रे मशीन भी काफी समय से खराब पड़ी है।
आसपास के गांवों के मरीजों को एक्स-रे करवाने के लिए शहर के नागरिक अस्पताल में आना पड़ता है। वहीं सातरोड़ गांव में सीएचसी एक चौपाल के अंदर चल रही है। कुछ साल पहले सीएचसी की कंडम बिल्डिंग को गिरा दिया था।
उसके बाद बजट पास होने के कारण भी नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य नहीं करवाया गया। ऐसे में चौपाल के अंदर ही मरीजों को चिकित्सक दवा दे रहे हैं। पहले सीएचसी में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की सुविधा थी, लेकिन अब गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के चलते शहर आना पड़ता है।
मरीजों को करना पड़ता है रेफर
आजादी के दस साल बाद 1957 में शहर में सरकारी अस्पताल खोला गय था। उस समय आबादी को देखते हुए 100 बैड की सुविधा थी। बाद में अस्पताल का विस्तार करते हुए 200 बैड की व्यवस्था की गई। इन सालों मे बैडों की संख्या तो बढ़ी लेकिन स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हो पाई। अस्पताल परिसर में शुरूआत से ही बर्न, हार्ट और कैंसर स्पेशलिस्ट चिकित्सक की कमी खलती आ रही है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले मरीजों को रैफर करना पड़ता है।
कैल्शियम और अन्य दवाइयां नहीं मिल रही
नागरिक अस्पताल में पूरे साल दवाइयों का टोटा रहता हैं। फिलहाल अस्पताल परिसर के अंदर दोनों दवाखाना में दिमाग से संबंधित दवाइयां नहीं है। इसके अलावा कैल्शियम, खाली पेट, कई प्रकार की आंखों और एलर्जी बीमारी की दवाइयां भी मरीजों को नहीं मिल रही। ऐसे में मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोरों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। यहां तक की कई बार तो मरीजों को बुखार की दवा भी नहीं मिलती। बजट में दवा के लिए अधिक राशि की व्यवस्था की जाए।
एयरपोर्ट के सामने राजकीय पशुधन फार्म की करीब 22 एकड़ जमीन अस्पताल के नाम ट्रांसफर करने के लिए फाइल राजस्व विभाग को भेजी गई है। उम्मीद है इस साल जमीन ट्रांसफर हो जाएगी।




