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हरियाणा का अनुबधित डॉक्टर झेल रहा है सरकार की दोहरी मार : डा. आरबी गोयल

अनुबधित डॉक्टरों के खिलाफ सरकार की वर्तमान नीतियां भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक

भिवानी,(ब्यूरो): हरियाणा के सरकारी अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमान संभालने वाले एनएचएम, आरबीएसके और सीएचओ डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक बिगुल फूंक दिया है। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) हरियाणा ने मुख्य सचिव को एक औपचारिक कानूनी प्रतिनिधित्व भेजकर स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उन्हें गैर-अभ्यास भत्ता (एनपीए) नहीं दे सकती तो उन्हें ड्यूटी के बाद निजी प्रैक्टिस करने से रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि नियमित डॉक्टरों की तर्ज पर सभी अनुबधित कैडरों को एनपीए दिया जाए, एनपीए ना देने की स्थिति में, ड्यूटी के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस की लिखित अनुमति दी जाए, अनुबधित कर्मचारियों के खिलाफ की जाने वाली मौखिक और मनमानी विभागीय कार्रवाइयों पर तुरंत रोक लगे।
नीमा हरियाणा के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान प्रदेश संरक्षक डा. आरबी गोयल ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार की वर्तमान नीतियां न केवल भेदभावपूर्ण हैं, बल्कि असंवैधानिक भी हैं। डा. गोयल ने कहा कि हरियाणा का अनुबधित डॉक्टर आज दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ उन्हें नियमित डॉक्टरों की तुलना में बहुत कम वेतन दिया जा रहा है, और दूसरी तरफ उन पर गैर-कानूनी तरीके से निजी प्रैक्टिस न करने का दबाव बनाया जा रहा है। जब मूल नियुक्ति विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त ही नहीं थी तो अब उन पर यह पाबंदी क्यों। उन्होंने कहा कि नीमा सरकार से पूछना चाहती हैं कि बिना एनपीए दिए आप एक पेशेवर डॉक्टर की आजीविका के अधिकार को कैसे सीमित कर सकते हैं। अदालतों ने बार-बार कहा है कि डॉक्टरों को बंधुआ मजदूर नहीं माना जा सकता। उन्हांने कहा कि संविधान हर नागरिक को आजीविका कमाने का अधिकार देता है। बिना किसी वैधानिक मुआवजे (एनपीए) के प्रैक्टिस पर रोक लगाना मौलिक अधिकारों का हनन है। एनएचएम और आरबीएसके डॉक्टर भी वही चिकित्सा कानूनी जोखिम और कार्यभार उठाते हैं जो नियमित डॉक्टर उठाते हैं, लेकिन भत्तों के मामले में उनके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। भर्ती के समय जारी विज्ञापनों में निजी प्रैक्टिस पर रोक की कोई शर्त नहीं थी। कानूनन, सेवा शुरू होने के बाद नई दमनकारी शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं। डा. आरबी गोयल ने बताया कि हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अनुबधित डॉक्टरों के पक्ष में इसी तरह के एक मामले में हस्तक्षेप किया है। जब तक सरकार डॉक्टरों को उनके पेशेवर कौशल और समय का उचित मुआवजा (एनपीए के रूप में) नहीं देती, तब तक वह उनके व्यक्तिगत समय पर नियंत्रण नहीं कर सकती। डा. गोयल और नीमा हरियाणा ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक मांग नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व की लड़ाई है। यदि सरकार ने समय रहते इस कानूनी प्रतिनिधित्व पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो संगठन सक्षम न्यायिक मंचों (न्यायालय) का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेगा।

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