सांग समाज को जगाने व जोडऩे का काम करता है: हनुमान कौशिक
भिवानी, 2 फरवरी। गांव बौंद कलां में बाबा चंद्र दास धाम में आयोजित मेले में सांगी दान सिंह को 32 पंवार खाप की तरफ से सम्मानित किया गया। धर्मबीर सिंह नागर ने गांव की तरफ से कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित म्हारी संस्कृति म्हारा स्वाभिमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हनुमान कौशिक ने कहा कि प्राचीन सभ्यता संस्कृति संगीत और संस्कारों की पहचान है सांग। सांग एक ऐसी विधा है जो समाज को जगाने और जोडऩे का काम करता है । चिरकाल से यहां सोग मनोरंजन के साथ-साथ राजाओं महाराजाओं के किससे कहानी पर आधारित ऐतिहासिक बातों से रूबरू करना उसी को सांग कहते हैं। हरियाणवी गायन शैली की ऐसी 40 विधा है जिनके माध्यम से आम जनमानस में आपसी प्रेम भाईचारा बढ़ता क्योंकि कुछ सॉन्ग प्रेम मोहब्बत का संदेश देते वहीं कुछ सॉन्ग देश भक्ति और और मर्यादा पर चलने का संदेश देते । जिससे हमें अपनी प्राचीन सभ्यता संस्कृति संस्कारों से सुसज्जित संसार की संरचना का आज भी प्रभाव नजर आता है। देश की आजादी के समय गीतकार संगीतकार मैं अपनी लेखनी से देशभक्ति का ऐसा माहौल तैयार किया वीरों और वीरांगनाओं ने देश के लिए खुद को और अपने संतानों को देश के लिए बलिदान देने की भावना पैदा की। आज का युवा अपनी संस्कृति को भूल पाश्चात्य संस्कृति और नशे की ओर अगर सर होता जा रहा है । समय रहते अगर युवाओं ने अपना जीवन संवारने के लिए सांग का होना बहुत जरूरी है। इस अवसर पर समस्त ग्रामीण उपस्थित रहे।




