Gold-Silver ETF New Rules: सेबी (SEBI) बदलने जा रहा है गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ के नियम, अब निवेश करना होगा और भी सुरक्षित

अगर आप भी उन निवेशकों में शामिल हैं जो भौतिक सोने-चांदी के बजाय ईटीएफ (ETF) के जरिए कीमती धातुओं में पैसा लगाना सुरक्षित मानते हैं, तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी है. अक्सर देखने में आता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव कुछ और होते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में ईटीएफ की कीमतें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं. इस अंतर के चलते कई बार निवेशकों को न चाहते हुए भी नुकसान उठाना पड़ता है या फिर वे सही भाव पर खरीद-बिक्री नहीं कर पाते. अब बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कमर कस ली है और नियमों में एक बड़े बदलाव का खाका तैयार किया है.
क्यों जरूरी हुआ नियमों में बदलाव?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर समस्या है कहां. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी लगभग 24 घंटे ट्रेड होते हैं. वहां आधी रात को कोई बड़ी हलचल हो सकती है, कीमतें अचानक आसमान छू सकती हैं या गिर सकती हैं. लेकिन भारत में ईटीएफ सिर्फ बाजार के सीमित समय (मार्केट आवर्स) में ही ट्रेड होते हैं.
मौजूदा नियमों के तहत, ईटीएफ की कीमतों पर एक ‘फिक्स्ड प्राइस बैंड’ लगा होता है. यानी कीमत एक दिन में एक निश्चित सीमा से ज्यादा ऊपर या नीचे नहीं जा सकती. जब ग्लोबल मार्केट में बड़ी उठापटक होती है, तो भारतीय ईटीएफ अपने फिक्स्ड बैंड के कारण उस बदलाव को पूरी तरह नहीं अपना पाते. नतीजा यह होता है कि ईटीएफ की कीमत और उसकी असली वैल्यू (NAV) में बड़ा अंतर आ जाता है. सेबी का मानना है कि यह व्यवस्था अब पुरानी हो चुकी है और इसमें बदलाव वक्त की मांग है.
फिक्स्ड नहीं, अब ‘डायनामिक’ होगा प्राइस बैंड
सेबी ने अपने 14 फरवरी 2026 के कंसल्टेशन पेपर में प्रस्ताव दिया है कि पुराने फिक्स्ड सिस्टम को हटाकर ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ लागू किया जाए. यह नया सिस्टम बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से खुद को ढाल सकेगा. प्रस्ताव के मुताबिक, शुरुआती प्राइस बैंड ±6% का होगा. अगर बाजार में हलचल तेज होती है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकेगा.
इसे ऐसे समझें कि अगर सोने के दाम में अचानक तेजी आती है, तो यह बैंड 3% और बढ़ जाएगा. हर बदलाव के बाद बाजार को थोड़ा थमने के लिए 15 मिनट का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ दिया जाएगा. दिन भर में अधिकतम दो बार ऐसा किया जा सकेगा और कुल लिमिट ±20% तक जा सकेगी. इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशक को ईटीएफ की जो कीमत स्क्रीन पर दिखेगी, वह उसकी वास्तविक वैल्यू के बेहद करीब होगी.
बाजार खुलने से पहले ही तय होगी दिशा
सेबी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जो है ‘प्री-ओपन सेशन’ की शुरुआत. शेयर बाजार की तरह अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए भी बाजार खुलने से पहले एक खास सत्र हो सकता है. इसका मकसद यह है कि रात भर में विदेशी बाजारों में जो भी बदलाव हुए हैं, उन्हें भारतीय बाजार खुलने से पहले ही एडजस्ट कर लिया जाए. इससे सुबह बाजार खुलते ही कीमतों में दिखने वाले भारी गैप को कम किया जा सकेगा और निवेशकों को एक संतुलित शुरुआत मिलेगी.
छेड़छाड़ रोकने के लिए सख्त शर्तें
नए नियमों में सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है. कहीं कोई ऑपरेटर जानबूझकर कीमतें बढ़ाकर बैंड न बदलवा ले, इसके लिए सेबी ने सख्त शर्तें रखी हैं. प्राइस बैंड में बदलाव (फ्लेक्स) तभी लागू होगा जब कम से कम 50 ट्रेड हुए हों, उसमें 10 अलग-अलग क्लाइंट्स शामिल हों और तीन अलग-अलग ट्रेडिंग मेंबर्स की भागीदारी हो. यानी बदलाव तभी होगा जब बाजार में असली खरीद-बिक्री हो रही हो. फिलहाल सेबी ने इस प्रस्ताव पर मार्च 2026 तक लोगों से राय मांगी है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा.




