ज़्विगाटो स्क्रीनिंग के बाद गिग वर्कर्स ने असुरक्षित काम और सेहत पर जताई चिंता

नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 : फिल्म ‘Zwigato’ की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के बाद राजधानी में गिग इकॉनमी की वास्तविकताओं को लेकर एक अहम पैनल चर्चा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम जनपहल और गिग वर्कर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुआ, जिसमें फिल्मकारों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और गिग वर्कर्स ने भाग लेकर प्लेटफॉर्म-बेस्ड काम से जुड़ी असुरक्षा, स्वास्थ्य जोखिम और श्रम अधिकारों पर खुलकर संवाद किया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए फिल्म की निर्देशक नंदिता दास ने कहा कि ‘Zwigato’ डिलीवरी वर्कर्स की रोजमर्रा की चुनौतियों, सम्मान और जिजीविषा को सामने लाती है। उन्होंने कहा कि गिग इकॉनमी लचीलापन का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर एल्गोरिदमिक नियंत्रण, आय की अनिश्चितता और लगातार दबाव वर्कर्स में गहरी असुरक्षा और अकेलेपन को बढ़ा देते हैं।
पैनल में शामिल राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि असुरक्षित कार्य परिस्थितियां, घटती कमाई और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र का अभाव गिग और प्लेटफॉर्म डिलीवरी वर्कर्स के शोषण को बढ़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां संवाद के बजाय ऐप-बेस्ड सस्पेंशन, एल्गोरिदमिक पेनल्टी और डराने-धमकाने के तरीकों का सहारा ले रही हैं। उन्होंने गिग वर्कर्स को श्रम कानूनों के दायरे में लाने और उन्हें कानूनी अधिकार, सम्मान व सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया।
पैनल चर्चा का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन ने किया। इस दौरान पूजा, मोहम्मद इरफान, भूपेंद्र नारायण भूपेश और शिव प्रजापति सहित गिग वर्कर्स ने लंबे कार्य घंटे, सड़क हादसे, सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न, टॉयलेट व पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी और मनमाने जुर्मानों से होने वाले आय नुकसान के अनुभव साझा किए।
इस मौके पर जनपहल की ओर से ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (OSH) पर आधारित अखिल भारतीय शोध रिपोर्ट भी जारी की गई। 10 शहरों में 1,000 गिग वर्कर्स पर किए गए सर्वे में सामने आया कि 57 प्रतिशत से अधिक वर्कर्स सप्ताह में 49 घंटे से ज्यादा काम करते हैं, 62 प्रतिशत के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है और बड़ी संख्या में वर्कर्स अत्यधिक गर्मी, मानसिक तनाव और शारीरिक दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में गिग वर्क को औपचारिक श्रम के रूप में मान्यता देकर सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की गई है।




