यूपी के प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन शुरू, लेकिन किराए पर रहने वालों के लिए बंद हुए रास्ते; जानें नया नियम

उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन पाने का मौका है. इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रोसेस शुरू कर दिया है. विभाग ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत निम्न आय वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन देने के लिए प्रोसेस शुरू किया है. इसके लिए जिले स्तर पर 2 फरवरी 2026 से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन इस बार RTE से एडमिशन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत यूपी के प्राइवेट स्कूलों में RTE से फ्री एडमिशन के लिए किराए के मकान में रहने वाले अभिभावकों के बच्चे आवेदन नहीं कर सकेंगे.
आइए, जानते हैं कि यूपी के कितने प्राइवेट स्कूलों की कितनी सीटों में RTE से एडमिशन देने के लिए प्रोसेस शुरू हुआ है? जानेंगे कि कब तक और कैसे आवेदन किया जा सकता है? साथ ही जानेंगे कि एडमिशन के लिए कौन से दस्तावेज की जरूरत होगी और किराए के मकान में रहने वाले बच्चे क्यों आवेदन नहीं कर सकेंगे?
RTE से 25 % सीटें आरक्षित, फीस और ड्रेस फ्री
इस पूरे मामले पर आगे बढ़ने से पहले यूपी के प्राइवेट स्कूलों में फ्री एडमिशन का गणित समझते हैं. असल में शिक्षा का अधिकार अधिनयम (RTE) 2009 में 8वीं तक फ्री शिक्षा का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही RTE में प्राइवेट स्कूलों में EWS और वंचित वर्ग (SC-ST, OBC, अनाथ, दिव्यांग और विधवा आश्रित) के बच्चों के लिए भी फ्री शिक्षा का प्रावधान किया गया है. इसके लिए प्राइवेट स्कूलों में प्री प्राइमरी की 25 फीसदी सीटें EWS और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए रिजर्व हैं. इन सीटों पर एडमिशन लेने वाले बच्चों को स्कूल ड्रेस फ्री मिलती है और फीस का भुगतान भी नहीं करना होता है.
210000 सीटों पर मिलेगा एडमिशन
यूपी शिक्षा बेसिक विभाग ने एकेडमिक सेशन 2026-27 में प्राइवेट स्कूलों में RTE से एडमिशन का प्रोसेस शुरू किया है, जिसके तहत प्रदेशभर के प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी से पहली कक्षा तक की सीटों में एडमिशन के लिए ये प्रोसेस शुरू किया गया है. एक आंकडे़ं के अनुसार 2 लाख 10 हजार से अधिक सीटों पर एडमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई है. जिला स्तर पर 16 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है.
किराएदारों के बच्चे नहीं कर सकेंगे आवेदन
यूपी प्राइवेट स्कूलों में RTE से एडमिशन का प्रोसेस शुरू हो गया है, जिसके तहत EWS और वंचित वर्ग के अभिभावक अपने बच्चों के एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने नियमों में बदलाव किया है. विभाग की तरफ से जारी गाइडलाइंस के अनुसार सिर्फ वे ही अभिभावक अपने बच्चों के एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिनके मकान का रजिसट्रेशन रजिस्ट्रार कार्यालय में हैं. इस नियम के लागू हो जाने से किराए पर रहने वाले अभिभावक अपने बच्चों के एडमिशन के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं.
आवेदन के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत
- तहसीलदार की तरफ से जाति प्रमाण पत्र (SC, ST, OBC) बच्चों के लिए.
- खाद्य विभाग की तरफ से जारी गरीबी रेखा से नीचे का राशन कार्ड और वार्षिक आय प्रमाण पत्र
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तरफ से जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (HIV, कैंसर रोगियों) के बच्चों के लिए
- सक्षम अधिकारी की तरफ से जारी प्रमाण पत्र (अनाथ बच्चों के लिए)
- स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग की तरफ से जारी प्रमाणपत्र (दिव्यांग आश्रित या विधवा महिला) के बच्चों के लिए.
- तहसीलदार की तरफ से जारी निवास प्रमाण पत्र, मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड, पासपोर्ट
किराएदारों के बच्चों को आवेदन से रोकन नियमों के खिलाफ
यूपी प्राइवेट स्कूलों में RTE एडमिशन प्रोसेस के नियमों में बदलाव किया गया है, जिसके तहत किराए पर रहने वाले अभिभावक अपने बच्चों के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे. नियमों में इस बदलाव का विरोध शुरू हो गया है. शिक्षा समेत EWS एडमिशन के लिए काम कर रहीदिल्ली हाईकोर्ट में अधिवक्ता और जस्टिस फाॅर ऑल की सेक्रेटरी शिखा शर्मा बग्घा कहती हैं कि ऐसे नियम RTE की अवहेलना हैं. वह कहती हैं RTE का मकसद वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है. इन नियमों से तो ऐसे बच्चे सिस्टम से बाहर हो जाएंगे.




