भारत के हेल्थकेयर पर विदेशियों को भी हो रहा भरोसा, 3 साल में इतने लाख करोड़ का किया निवेश

भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में बीते तीन वर्षों में जबरदस्त निवेश देखने को मिला है. देश में 2022 से 2024 के बीच हॉस्पिटल चेन और हेल्थकेयर सर्विस से जुड़ी कंपनियों में कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये (30 अरब डॉलर) का निवेश हुआ है. विदेशी कंपनियों का देश के हेल्थ सेक्टर पर भरोसा बढ़ रहा है इसीलिए वह इस सेक्टर में खूब पैसा लगा रही हैं. आइए डिटेल में समझते हैं हेल्थ केयर सेक्टर पर विदेशी क्यों यकीन कर रहे हैं और भारत को इससे क्या फायदा होगा.
पिछले 3 सालों से देश के हेल्थ सेक्टर में विदेशी कंपनियों का निवेश बढ़ा है. यह निवेश अस्पतालों के विस्तार, अधिग्रहण और नई टेक्नोलॉजी के विकास के लिए किया गया. भारत के लिए निवेश इस लिहाज से भी खास है क्योंकि इससे आने वाले समय में 24 लाख लोगों को नौकरियां मिल सकती हैं.
3 साल में तेजी से बढ़ा हेल्थ सेक्टर
भारत के हेल्थ सेक्टर में पिछले तीन सालों में एकाएक तेजी देखने को मिली है. साल 2022 से लेकर 2024 के बीच में मर्जर और अधिग्रहण से 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ. वहीं, इस दौरान करीब 27,400 करोड़ रुपये विदेशी हेल्थकेयर कंपनियों ने भारतीय हॉस्पिटल और हेल्थ से जुड़ी सर्विसेज पर खर्च किया है. विदेशी कंपनियों ने काफी बड़ी मात्रा में डील भी की हैं. साल 2024 की शुरुआत में मलेशिया की IHH हेल्थकेयर ने 17,171 करोड़ रुपये में बड़ा अधिग्रहण किया था. इसके अलावा मुक्ता हेल्थकेयर ने 9,000 करोड़ रुपये, मणिपाल हेल्थ ने 3,434 करोड़ रुपये में डील की थी.
कंपनी का नाम
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डील वैल्यू (करोड़ रुपये में)
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IHH हेल्थकेयर – खालिया हेल्थकेयर
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43,000
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ब्लैकस्टोन – कैपिटल एक्सप्रेस हेल्थकेयर
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17,171
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मुक्त हेल्थकेयर
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9,000
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मणिपाल हेल्थ
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3,434
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मैक्स हेल्थकेयर
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1,300
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रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल्स
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1,240
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एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज
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300
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कहां लगे ज्यादा पैसे
कंसल्टेंसी फर्म ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश में करीब 40 प्रतिशत पैसा कंपनियां हॉस्पिटल पर ही खर्च कर रही हैं. हालांकि, अभी भी देश के अस्पतालों में 60 प्रतिशत बिस्तर की व्यवस्था सिर्फ दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में ही है. वहीं, हकीकत में देश की 70 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है. रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थ सेक्टर में जो निवेश बढ़ा है, इससे अस्पताल गांव और छोटे शहरों तक अपनी पहुंच को बढ़ाएंगे. साथ ही टियर 2 और टियर 3 शहरों से इस सेक्टर का अच्छा-खासा बूस्ट मिलेगा.
क्यों विदेशी निवेशक लगा रहे हैं पैसा?
3 सालों में जो हेल्थ सेक्टर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. उसमें विदेशी निवेशकों की काफी भूमिका है. इस दौरान करीब 27,400 करोड़ रुपये विदेशी फर्मों ने इंडिया के हेल्थ सिस्टम पर खर्च किए हैं. सरकार ने हेल्थ सेक्टर में 100% FDI (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट) की छूट दी है. इससे भारत में अस्पताल चेन को विस्तार करने में मदद मिली है और अब विदेशी कंपनियां भारत के हेल्थ सेक्टर में बड़ा मुनाफा देख रही हैं.
आगे और बूस्ट होगा हेल्थ सेक्टर
EY और रोलैंड बर्गर जैसी रिसर्च कंपनियों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में हेल्थ सेक्टर में AI, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग काफी बढ़ेगा. इससे इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी और लागत कम होगी. इसके साथ ही अस्पतालों की वैल्यू में 30 गुना तक की बढ़ोतरी हो सकती है. एक रिपोर्ट के अनुसार हॉस्पिटल चेन की वैल्यू आने वाले समय में 20x से 30x तक बढ़ सकती है. मरीजों की संख्या में इजाफा, इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और मेडिकल टूरिज्म इस ग्रोथ को बढ़ावा दे रहे हैं.
इस सेक्टर में रिलायंस और अडानी ग्रुप भी आ गए हैं. रिलायंस ग्रुप ने कार्किनोस हेल्थकेयर को खरीदा है और गौतम अडानी का अडानी ग्रुप भी हेल्थ सेक्टर में एंट्री की तैयारी में है और 1,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है. हेल्थ सेक्टर में हो रहे इस भारी निवेश से न सिर्फ बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि रोजगार के मौके भी बनेंगे. टेक्नोलॉजी, एफडीआई और बिजनेस मॉडल्स के चलते आने वाले वर्षों में भारत का हेल्थकेयर सिस्टम आने वाले समय में और मजबूत हो सकता है.