भारत वर्ष के प्रत्येक त्यौहार का अपना महत्व है: संत कंवर हुजूर
भिवानी, (ब्यूरो): गुरु का हुक्म परमात्मा का हुक्म है और परमात्मा के हुक्म के बिना पता तक नहीं हिलता। जो गुरु का हुक्म मानता है उसको कभी नीचा भी देखता गुरु की शरणाई हृदय में भक्ति रूपी हरियाली लाती है। जैसे सावन में तीज का त्यौहार प्रकृति को हरा के देता है वैसे ही गुरु का सत्संग मनुष्य के जीवन में भक्ति रूपी हरियाली लाता है।यह सत्संग वचन परमसंत सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने तीज त्यौहार के अवसर पर उपस्थित साध संगत को बधाई संदेश देते हुए फरमाए। हुजूर कंवर साहेब ने उपस्थित संगत के साथ तीज का झुला झूलते हुए कहा कि भारत वर्ष के प्रत्येक त्यौहार का अपना महत्व है। तीज को त्यौहार के प्रारंभ का अवसर भी माना जाता है।उन्होंने कहा कि संतो ने सावन के महीने की महिमा गाई है क्योंकि यह माह हृदय में उल्लास भरता है।संत मानते हैं कि जैसे सावन माह प्रकृति में हरियाली लेकर आता है वैसे ही मानव जीवन में भी भक्ति रूपी हरियाली आती है। उन्होंने फरमाया कि त्यौहार चाहे कोई भी हो अगर वो गुरु की सोहबत में उनके चरणों में मनाया जाए तो उसका महत्व बहुत बढ़ जाता है। हम रूह की बेहतरी के लिए,मानव जीवन के कल्याण के लिए गुरु की खोज करते हैं। गुरु मिलता है तभी लेखा निमड़ता है। गुरु को पाने के लिए लग्न और विरह चाहिए गुरु से प्रीत बनावटी नहीं होनी चाहिए। जुबानी जमा खर्च भक्ति में नहीं चलता। गुरु भक्ति के लिए तो हृदय की शुद्धता चाहिए। शुद्ध हृदय वाला ही शब्द भेद को जान सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मन कर्म वचन से पवित्र रहते हुए सुखाला जीवन जियो।




