हरियाणा

मौत भी न मिटा सकी जाति की दीवारें

भिवानी । विडंबना है कि जातिवाद के दंश से समाज अब भी मुक्त नहीं हो पाया है। हिसार जिले के अग्रोहा खंड के गांव खासा महाजन में तो श्मशान घाट तक को अगड़ी और पिछड़ी जातियों में बांट दिया गया। बाकायदा दोनों पर अलग-अलग बोर्ड लगा दिए जिन पर अनुसूचित जाति और जनरल श्मशान घाट लिखा गया। हालांकि मामला चर्चा में आने के बाद ग्राम पंचायत ने बोर्ड अब हटा दिए हैं।श्मशान घाट में भी जातिगत भेदभाव के इस गंभीर मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लेते हुए हिसार जिला प्रशासन से कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट-एटीआर) तलब की है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य भिवानी निवासी सुशील वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया कि खासा महाजन गांव के श्मशान घाट में सामान्य वर्ग एवं अनुसूचित जाति के मृत लोगों के लिए अलग-अलग अंतिम संस्कार स्थल चिह्नित किए गए हैं। इसके बाकायदा बोर्ड भी लगाए गए हैं। यह कृत्य न केवल असांविधानिक है, बल्कि मानव गरिमा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे मानवाधिकारों का प्रथमदृष्टया उल्लंघन मानते हुए मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है। आयोग ने हिसार के उपायुक्त को निर्देश दिए हैं कि दो सप्ताह के अंदर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करें। आयोग ने यह भी माना है कि इस प्रकार की प्रथाएं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 17 का उल्लंघन हैं। इसके साथ ही अस्पृश्यता और सामाजिक बहिष्कार को बढ़ावा देती हैं, जो कि लोकतांत्रिक समाज में अस्वीकार्य है।

Related Articles

Back to top button