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कौन हैं रघुवीर खेडकर? तमाशा लोक कला को पुनर्जीवित करने वाले महाराष्ट्र के वो कलाकार जिन्हें मिला पद्मश्री पुरस्कार

केंद्र सरकार ने साहित्य, शिक्षा, सामाजिक सेवा, चिकित्सा, कला और सार्वजनिक क्षेत्र में योगदान देने वाले विशिष्ट लोगों को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की है. केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि महाराष्ट्र के दिग्गज लोक रंगमंच कलाकार रघुवीर खेडकर को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 के पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. उन्हें यह सम्मान लोक कला तमाशा में उनके योगदान और इस कला को संरक्षित एवं बढ़ावा देने के लिए दिया गया है.

रघुवीर खेडकर एक वरिष्ठ तमाशा कलाकार हैं और तमाशा जगत में एक अनुभवी कलाकार के रूप में जाने जाते हैं. रघुवीर खेडकर पिछले चार दशकों से तमाशा थिएटर में कार्यरत हैं. वे अपनी माता कांताबाई सतरकर द्वारा शुरू किए गए तमाशा थिएटर का आज तक सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं. वे महाराष्ट्र राज्य ढोलकी फड़ तमाशा एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं.

रघुवीर खेडकर ने तमाशा संस्कृति को संरक्षित करने और इसे राज्य से बाहर फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. आइए जानते हैं गांवों में तमाशा प्रस्तुत करने वाले रघुवीर खेडकर का पद्म श्री तक का सफर:-

‘तमाशा महर्षि’ के नाम से जाने जाते हैं खेडकर

रघुवीर खेडकर महाराष्ट्र के एक बहुत ही वरिष्ठ और लोकप्रिय तमाशा कलाकार हैं. संगमनेर के पुत्र खेडकर तमाशा में गीतद्या की भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं. हर साल महाराष्ट्र के गांवों में एक यात्रा आयोजित की जाती है, जिसमें रघुवीर खेडकर तमाशा प्रस्तुत करते हैं.

उनकी कला ने पूरे महाराष्ट्र के लोगों के दिलों पर राज किया है. उन्हें अतीत में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. तमाशा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘तमाशा महर्षि’ के नाम से जाना जाता है.

मां से विरासत में मिली लोक कला

रघुवीर खेडकर को तमाशा कला विरासत में मिली है. उनकी माता कांताबाई सतरकर एक महान तमाशा कलाकार थीं. रघुवीर खेडकर को बचपन से ही तमाशा से प्रेम हो गया था. उन्होंने अपनी माता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए पारंपरिक लोक नाट्य तमाशा की परंपरा को संरक्षित रखा है.

वे कई वर्षों से तमाशा मंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. कला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय द्वारा ‘जीवन साधना गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है.

कोराना काल में कलाकारों के लिए उठाई आवाज

कोरोना काल में तमाशा कलाकारों का बुरा समय बीता. कई गांवों में यात्राएं रद्द होने के कारण तमाशा कलाकारों को भूखमरी का सामना करना पड़ा. उस समय रघुवीर खेडकर ने तमाशा कलाकारों के लिए सरकार से मदद की गुहार लगाई थी. उन्हें कई तमाशा कलाकारों का समर्थन भी मिला.

कोरोना काल समाप्त होने के बाद तमाशा फिर से शुरू हो गया है. रघुवीर खेडकर गान, गवलन, बतावनी और वाग्नाट्य जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन करके गांवों के लोगों का मनोरंजन करते नजर आ रहे हैं. अब उनकी कला को मान्यता देते हुए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है.

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