दिल्ली मेट्रो का नया तोहफा: 9.91 KM लंबा कॉरिडोर और 9 नए स्टेशन; अब ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) राजधानी में यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए मेजेंटा लाइन (लाइन-8) के एक अहम विस्तार पर तेजी से काम कर रहा है. रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ तक प्रस्तावित यह नया कॉरिडोर लगभग 9.913 किलोमीटर लंबा होगा और पूरी तरह अंडर ग्राउंड बनाया जाएगा. इस सेक्शन में कुल नौ नए स्टेशन बनाए जाएंगे, जो दिल्ली के कई अहम इलाकों को सीधे मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेंगे.
प्रस्तावित नए स्टेशनों में रामकृष्ण आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल-हाई कोर्ट, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम और इंद्रप्रस्थ शामिल हैं. ये सभी स्थान प्रशासनिक, ऐतिहासिक और व्यावसायिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. वर्तमान में इन क्षेत्रों में पहुंचने के लिए लोगों को बसों, ऑटो, टैक्सी या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या बढ़ती है. मेट्रो सुविधा उपलब्ध होने से इन इलाकों तक पहुंचना अधिक तेज और सुगम होगा.
प्रमुख कॉरिडोरों में से एक मेजेंटा लाइन
मेजेंटा लाइन पहले ही दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख कॉरिडोरों में अपनी पहचान बना चुकी है. इस नए विस्तार से इसकी उपयोगिता और दायरा दोनों बढ़ेंगे. खास तौर पर इंद्रप्रस्थ क्षेत्र, जो पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है, इस परियोजना से बेहतर तरीके से जुड़ सकेगा. यात्रियों को इंडिया गेट, भारत मंडपम और दिल्ली हाई कोर्ट जैसे प्रमुख स्थलों तक सीधे मेट्रो से पहुंचने का लाभ मिलेगा, जिससे यात्रा समय में काफी कमी आने की उम्मीद है.
पर्यावरणीय दृष्टि से भी फायदेमंद
डीएमआरसी का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी फायदेमंद साबित होगा. जब अधिक लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो का उपयोग करेंगे तो ईंधन की खपत घटेगी और वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी. इसके अलावा रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लाखों यात्रियों का समय बचेगा, जिससे उत्पादकता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
डीएमआरसी का लक्ष्य इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करना है, ताकि दिल्ली का मेट्रो नेटवर्क और अधिक व्यापक व प्रभावी बन सके.यह विस्तार राजधानी के बढ़ते शहरी दबाव को संतुलित करने और भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक अहम कदम माना जा रहा है.




