भिवानी। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 को लेकर सरकार ने शहरी निकायों के लिए टूल किट जारी की है। स्वच्छता पोर्टल पर अपलोड होने वाला डेटा ही सर्वेक्षण के मूल्यांकन और रैंकिंग का आधार बनेगा। किसी भी स्तर की चूक, देरी या गलत जानकारी से स्वच्छता अंकों और शहर की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। लेकिन शहर में बनाए गए सार्वजनिक शौचालय टेंडर न होने के कारण बंद पड़े हैं। ऐसे शौचालय बंद होने से रैंकिंग प्रभावित होने की संभावना है। पिछले साल भी इसी कारण शहर की रैंकिंग प्रभावित हुई थी। वहीं शहर में लगे की कचरे के ढेर भी अंक कटने का कारण बन सकते हैं।
स्वच्छता के लिए नगर निकाय विभाग द्वारा पोर्टल पर डेटा अपलोड करने की अंतिम तिथि एक फरवरी निर्धारित की गई है। विभाग द्वारा जारी टूलकिट के अनुसार 18 जनवरी से शहर का स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 शुरू हो चुका है जो एक फरवरी तक चलेगा। इस बार मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया गया है। अब फोकस केवल कागजी दावों पर नहीं बल्कि मैदानी सत्यापन, नागरिक केंद्रित स्वच्छता सेवाओं, डिजिटल गवर्नेंस और रीयल टाइम डेटा उपलब्धता पर रहेगा। विभाग स्वच्छता पोर्टल से यूएलवी-वाइज प्रदर्शन डेटा निकालकर मूल्यांकन करेगा। पोर्टल पर डेटा की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति व अपलोड किए जाने वाले फोटो का जियो-टैगिंग अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की देरी, लापरवाही या निर्देशों की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा और प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
सार्वजनिक शौचालयों के कारण पिछले साल भी प्रभावित रही रैंकिंग
विभाग द्वारा स्वच्छता के अलग-अलग मदों के लिए स्कोर कार्ड निर्धारित किया गया है। गारबेज मुक्त सिटी के लिए 1,000 अंक, ग्राउंड मूल्यांकन के बाद 10,500 अंक दिए जाएंगे। वहीं शौचालयों की सफाई (ओडीएफ) मूल्यांकन के लिए 1,000 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग और सफाई होना अनिवार्य है। वर्तमान में टेंडर न होने के कारण ये शौचालय बंद हैं जिससे ओडीएफ प्रभावित होने के कारण रैंकिंग पर असर पड़ेगा।
पोर्टल पर जियो-टैग फोटो और रिकॉर्ड चढ़ाना अनिवार्य
विभाग के अनुसार पोर्टल पर अपलोड किया जाने वाला डेटा तथ्यात्मक होना अनिवार्य है। साथ ही जियो-टैग की गई फोटो भी अपलोड करनी होगी। बिना उपयुक्त दस्तावेज के अपलोड किया गया डेटा आपत्ति का कारण बन सकता है जिससे शहर का स्वच्छ और सुंदर शहर बनने का सपना अधूरा रह सकता है।
अपलोड डेटा में गड़बड़ी पाए जाने पर नगर परिषद जिम्मेदार
रैंकिंग के लिए पोर्टल पर अपलोड किए गए डेटा में असेसमेंट, ग्राउंड जांच या नागरिक फीडबैक में यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो इसकी जिम्मेदारी नगर परिषद की होगी। रैंकिंग और स्कोर पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं निकाय द्वारा सफाई कर्मियों, ठेकेदारों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को स्वच्छ सर्वेक्षण के नए ढांचे और दस्तावेजी आवश्यकताओं के लिए प्रशिक्षित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
भिवानी की पिछले पांच सालों की स्वच्छता रैंकिंग
2020
166
2021
244
2022
241
2023
302
2024
258
स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए निकाय विभाग द्वारा टूल किट जारी की जा चुकी है। नगर परिषद के साथ-साथ शहरवासियों की भी स्वच्छता में सुधार के लिए जिम्मेदारी है। इस साल हम सभी मिलकर स्वच्छता रैंकिंग में सुधार करेंगे ताकि हमारा शहर देश के साफ-सुथरे शहरों में शामिल हो। नगर परिषद द्वारा शहर में सुधार के लिए कार्य किए जा रहे हैं। सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव के लिए इसी सप्ताह टेंडर भी लगाया जा रहा है।
शहर की स्वच्छता में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस साल शहर से 12 अवैध कचरा प्वाइंट बंद करवाए गए हैं। शहर के रेस्टोरेंट संचालकों को गीला और सूखा कचरा निस्तारण के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। समय-समय पर अभियान चलाकर शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए आमजन को जागरूक किया जा रहा है। शहर में स्वच्छता सुधार के लिए सभी की भागीदारी जरूरी है।