भिवानी। देर रात तक अंधेरे में मोबाइल चलाने की बढ़ती आदत युवाओं की आंखों को कमजोर कर रही है। इसके चलते आंखों से पानी आना, खुजली, संक्रमण, धुंधला दिखाई देना और आंखों के नीचे सूजन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। चिकित्सक मरीजों की स्थिति के अनुसार चश्मा लगाने और डिजिटल स्क्रीन का उपयोग कम करने की सलाह दे रहे हैं।
शहर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से दो स्थानों पर आंखों के मरीजों की जांच की जा रही है। एक राजकीय किशनलाल जालान नेत्र अस्पताल और दूसरा पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में प्रतिदिन मरीजों की जांच हो रही है। दोनों ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में युवा आंखों की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। औसतन 40 से 50 युवा प्रतिदिन आंखों से संबंधित शिकायतों के साथ ओपीडी में आ रहे हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्क्रीन की बढ़ती मांग और अत्यधिक उपयोग युवाओं की आंखों को प्रभावित कर रहा है। डिजिटल युग में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। कई युवा कमरे की लाइट बंद कर देर रात तक मोबाइल का प्रयोग करते रहते हैं, जो आंखों के लिए हानिकारक है। यही आदत धीरे-धीरे आंखों से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा रही है।
राजकीय नेत्र अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. सतीश ने बताया कि देर रात तक मोबाइल का प्रयोग नींद को प्रभावित करता है। मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को बाधित करती है, जो नींद के लिए आवश्यक है। इससे अनिद्रा की समस्या बढ़ती है और आंखों में थकान सहित अन्य दिक्कतें बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से युवाओं में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) की समस्या भी बढ़ रही है।
उन्होंने सलाह दी कि आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करें और घर पर स्वयं कोई नुस्खा आजमाने से बचें।