13 दिसम्बर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत:कुमार
समाज में भाई चारा व बढ़ती है सामाजिक समरसता:कुमार

तोशाम(वीरेंद्र):एसडीजेएमसी सुनील कुमार ने बताया कि हरियाणा स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन कम जिला सत्र न्यायधीश डी आर चालिया व सचिव कम मुख्य न्यायिक दंडा अधिकारी पवन कुमार के दिशा निर्देश पर साल 2025 के लिए तय चौथी नेशनल लोक अदालत स्थानीय न्यायिक परिसर में 13.12.2025 को आयोजित की जाएगी। इस संबंध में हालसा के मेंबर सेक्रेटरी और डीएलएसए भिवानी के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-कम-चेयरमैन के निर्देशा अनुसार 13.12.2025 को होने वाली नेशनल लोक अदालत में ज़्यादा से ज़्यादा मामलों के निपटारे के लिए अब हर कार्य दिवस पर दोपहर 02:30 पीएम से शाम 04:30 पीएम तक स्पेशल प्री लोक अदालत आयोजित की जा रही है।
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राष्ट्रीय लोक अदालत की मुख्य विशेषताएं हैं कि यह स्वैच्छिक प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें विवाद का निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी और अंतिम होता है, कोई अपील की अनुमति नहीं होती, और यह निःशुल्क होती है। यह जन-केंद्रित और अनौपचारिक होती है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में भी सुलभ है, और यह मुकदमे-पूर्व तथा लंबित दोनों प्रकार के मामलों का निपटारा करती है। यह स्वैच्छिक कानूनी प्रक्रिया है। दोनों पक्ष विवाद का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से करने के लिए स्वेच्छा से सहमत होते हैं। इसमें बाध्यकारी निर्णय होते हैं। लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है और इसे न्यायालय के आदेश की तरह लागू किया जा सकता है। इसके निर्णय पर किसी भी अदालत में कोई अपील नहीं होती। एक बार निर्णय हो जाने के बाद, उस पर कोई अपील नहीं की जा सकती है। यह निःशुल्क है। इसमें कोई कोर्ट फीस नहीं ली जाती है। यदि मामला पहले से अदालत में है, तो निपटारा होने पर कोर्ट फीस वापस कर दी जाती है।
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राष्ट्रीय लोक अदालत में त्वरित और अनौपचारिक करवाई होती है। यह एक अनौपचारिक, लचीला और उपयोगकर्ता-अनुकूल मंच है जो त्वरित न्याय प्रदान करता है। व्यापक दायरे में मामले इसमें शामिल होते हैं। यह मुकदमे-पूर्व और न्यायालयों में लंबित दोनों तरह के दीवानी, फौजदारी (समझौता योग्य), और वैवाहिक मामलों को सुलझाता है।
राष्ट्रव्यापी आयोजन:-
यह पूरे देश में जिला और उपमंडल स्तर के न्यायालयों में आयोजित की जाती है।
जन-केंद्रित होती है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोगों तक न्याय पहुंचाने के लिए इसे सुलभ बनाया गया है। राष्ट्रीय लोक अदालत की आवश्यकता मुख्य रूप से अदालतों पर बोझ कम करने, मामलों के त्वरित और सस्ते निपटारे को बढ़ावा देने और न्याय को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए पड़ी। यह एक वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र है जो आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से हल करने में मदद करता है, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।
राष्ट्रीय लोक अदालत की आवश्यकता के प्रमुख कार-:
अदालतों पर बोझ कम करना है । देश भर की अदालतों में मामलों का भारी बैकलॉग है। लोक अदालतें लंबित मामलों को हल करके नियमित अदालतों पर दबाव कम करती हैं।
त्वरित और किफायती न्याय लोक अदालतों में विवादों का निपटारा बहुत कम समय में और बिना किसी कोर्ट शुल्क के हो जाता है, जिससे आम आदमी को मुकदमा लड़ने में लगने वाले समय और खर्च से राहत मिलती है। हर आदमी तक न्याय तक पहुंच होती है। यह समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान करता है, जिससे वे अपनी शिकायतों का समाधान कर सकें।
समझौते को बढ़ावा देना-:
राष्ट्रीय लोक अदालतें मध्यस्थता और सौहार्दपूर्ण सुलह पर आधारित हैं, जहां पक्षकार आपसी सहमति से विवादों का समाधान करते हैं। यह पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में मदद करता है। राष्ट्रीय लोक अदालत में होने वाले निपटारे को अंतिम माना जाता है, और इसके बाद किसी भी प्रकार की अपील या पुनरीक्षण कार्यवाही की आवश्यकता नहीं होती है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के मुख्य फायदे हैं, त्वरित समाधान, कम लागत (कोई कोर्ट फीस नहीं), न्यायालयों पर बोझ कम होना, और आपसी समझौते से न्याय। यह मामलों का निपटारा सुलह-समझौते के आधार पर करती है, जो समय, पैसा और तनाव बचाता है।
त्वरित और शीघ्र न्याय मिलता है। मामलों का निपटारा नियमित अदालतों की तुलना में बहुत जल्दी हो जाता है, अक्सर एक ही बैठक में किसी भी तरह का कोर्ट शुल्क या फीस नहीं लगती, जिससे यह सभी के लिए सुलभ हो जाती है। मुकदमेबाजी में कम खर्च होता है। इसमें समय और पैसा दोनों बचते हैं, और भविष्य में होने वाले मुकदमेबाजी और अपील की आवश्यकता नहीं रहती।
सरल और अनौपचारिक माहौल बनता है। यह एक सरल और कम डराने वाला मंच है, जहां पक्षकार आपसी सहमति से विवाद सुलझा सकते हैं।
न्यायालयों पर केसो दबाव कम-: यह नियमित अदालतों पर लंबित मामलों के बोझ को कम करने में मदद करती है। मुद्दों का सौहार्दपूर्ण निपटारा: यह मध्यस्थता और सुलह के सिद्धांतों पर काम करती है, जिससे पक्षकारों के बीच अच्छे संबंध बने रहते हैं। इसमें
विभिन्न मामलों का निपटारा होता है। यह विभिन्न प्रकार के नागरिक, आपराधिक और पूर्व-मुकदमेबाजी के मामलों (जैसे यातायात चालान) का निपटारा करती है।बाध्यकारी आदेश देता है। राष्ट्रीय लोक अदालत द्वारा दिए गए निर्णय को एक सिविल कोर्ट की डिक्री के समान बाध्यकारी माना जाता है।




