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दिल्ली से जयपुर अब सिर्फ 3 घंटे में, बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर सफर आज से शुरू; बनाने में लगे 1368 करोड़

दिल्ली से जयपुर के बीच यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का अहम हिस्सा, 67 किलोमीटर लंबा जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे का ट्रायल रन आज यानी बुधवार से शुरू हो गया है. इस फोर लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से दिल्ली से जयपुर की दूरी अब केवल 3 घंटे में तय की जा सकेगी. ट्रायल के दौरान अगर सभी ठीक रहता है, तो इस आम लोगों को लिए खोल दिया जाएगा. इसके निर्माण से समय के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी.

67 किलोमीटर लंबे जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेस-वे पर 10 दिनों तक ट्रायल रन चलेगा. बांदीकुई से जयपुर की दूरी अब इस एक्सप्रेसवे के जरिए मात्र 25 से 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी. पहले जयपुर जाने के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर दौसा तक जाना पड़ता था. बांदीकुई जयपुर एक्सप्रेसवे बन जाने से अब दौसा जाने की टेंशन खत्म हो गई है. अब बांदीकुई के रास्ते सीधे जयपुर पहुंच सकेंगे.

1368 करोड़ की लागत से हुआ निर्माण

ट्रायल रन के दौरान यहां से गुजरने वाले किसी भी वाहन चालक से कोई भी टोल शुल्क वसूला नहीं जाएगा. ट्रायल रन में टाइम, तकनीकी व्यवस्था और ट्रैफिक व्यवस्था की जांच की जाएगी. इस बीच समस्या नहीं आने पर इसे जल्द ही आम जनता को सौंप दिया जाएगा. साथ ही फास्टैग आधारित टोल प्रणाली लागू कर दी जाएगी. इसके निर्माण से दिल्ली से जयपुर की दूरी महज 3 घंटे में पूरी हो जाएगी. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के इस 67 किलोमीटर लंबे के हिस्से का निर्माण 1368 करोड़ की लागत से हुआ है.

समय और ईंधन की होगी बचत

इस पर गाड़ियों की अधिकतम स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है. एक्सप्रेस-वे पर कुल 5 इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिन पर गाडियां आसानी से चढ़ और उतरी सकेंगी. वहीं, टोल टैक्स की बात करें, तो जनता के लिए खुल जाने के बाद 150 रुपये टोल लिया जाएगा. सभी इंटरचेंज पर टोल कलेक्शन पूरी तरह फास्टैग आधारित होगा, जिससे ट्रैफिक निर्बाध और स्मूथ रहेगा. एक्सप्रेस-वे के निर्माण से समय की बचत के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी.

साथ ही प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी यह मिल का पत्थर साबित होगा. एक्सप्रेस-वे के ट्रायल रन के शुरू होने से लोग काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं. अब देखना यह होगा कि ट्रायल रन कितना सफल रहता है? और कब तक इसे पूरी तरह से लोगों के लिए खोला जाता है.

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