धर्म/अध्यात्म

Holika Dahan 2026: होलिका दहन पर अग्नि के कितने फेरे लेना है शुभ? जानें 1, 3 और 7 परिक्रमा का धार्मिक महत्व और सही विधि

हिंदू धर्म में होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. रंगवाली होली से ठीक एक रात पहले होलिका दहन की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका की अग्नि में नकारात्मकता को जलाकर सकारात्मकता का स्वागत किया जाता है. साल 2026 में होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि होलिका पूजन के समय अग्नि के कितने फेरे यानी परिक्रमा लेना सबसे शुभ होता है. आइए जानते हैं शास्त्रों और पंचांग के अनुसार क्या है सही संख्या और इसका महत्व.

शास्त्रों में क्या है सही संख्या?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका दहन की अग्नि के 1, 3 या 7 फेरे लगाए जाते हैं. इन संख्याओं का अपना-अपना आध्यात्मिक महत्व है.

1 फेरा

एक फेरा लगाने का अर्थ है अपने मन में एक संकल्प लेना. यह फेरा बुराइयों को त्यागने और सकारात्मक सोच अपनाने का प्रतीक माना जाता है.

3 फेरे

तीन फेरे त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और तीन गुण (सत्व, रज, तम) का प्रतीक माने जाते हैं. अधिकतर लोग 3 फेरे लगाते हैं. यह संख्या संतुलन और शुभता का संकेत देती है.

7 फेरे

सात फेरे जीवन के सात वचनों, सात जन्मों और सात लोकों से जुड़े माने जाते हैं. जो लोग विशेष मनोकामना लेकर होलिका की पूजा करते हैं, वे 7 फेरे लगाते हैं. इसे बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है.

परिक्रमा की सही विधि

  • होलिका दहन से पहले कच्चा सूत, नारियल, गेहूं की बालियां, गुड़ और चना अर्पित करें.
  • अग्नि प्रज्वलित होने के बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें.
  • घड़ी की दिशा (दाईं ओर से) परिक्रमा करें.
  • परिक्रमा करते समय परिवार की सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की कामना करें.
  • आखिर में होलिका की राख को माथे पर तिलक के रूप में लगाना शुभ माना जाता है.

परिक्रमा का आध्यात्मिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अग्नि को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि होलिका की अग्नि के चारों ओर घूमने से शरीर और मन की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.

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