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कनाडा ने भारत को दिया बड़ा तोहफा: 26/11 मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा की नागरिकता होगी रद्द, जानें क्यों?

मार्क कार्नी के नई दिल्ली दौरे से पहले कनाडा भारत को खुश करने में जुट गया है. इसके तहत कनाडा 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा की नागरिकता रद्द करने की तैयारी में है. कनाडा की सरकार की तरफ से राणा को इसकी जानकारी दे दी गई है. तहव्वुर वर्तमान में भारत के जेल में बंद है. पाकिस्तानी मूल के तहव्वुर को 2001 में कनाडा की नागरिकता मिली थी.

ग्लोबल न्यूज के मुताबिक कनाडा के आव्रजन अधिकारियों ने तहव्वुर को इसके बारे में सूचित किया है. अधिकारियों ने तहव्वुर पर झूठ बोलकर नागरिकता लेने का आरोप लगाया है.

तहव्वुर की नागरिकता क्यों छिनी जा रही है?

कनाडा आव्रजन विभाग के मुताबिक तहव्वुर राणा ने नागरिकता लेने वक्त झूठ बोला था. साल 2000 में जब तहव्वुर ने नागरिकता के लिए आवेदन किया था, तब उसने दावा किया था कि वह पिछले 4 वर्षों से ओटावा और टोरंटो में रह रहा है, जो कि झूठ निकला.

तहव्वुर ने इसके अलावा कनाडा से सिर्फ 6 दिन बाहर जाने की बात कही थी, लेकिन यह बात भी झूठ ही निकला. आव्रजन विभाक का कहना है कि नागरिकता लेने से पहले तहव्वुर ने अपना पूरा वक्त शिकागो में बिताया था. यहीं पर उसने अपनी संपत्ति भी बनाई थी.

आव्रजन विभाग का कहना है कि उसने धोखाधड़ी और जालसाजी की पूरी रिपोर्ट बनाकर न्यायालय को भेज दी है. उसी के पास नागरिकता छिनने का पूरा अधिकार है. न्यायालय के फैसले के बाद तहव्वुर राणा की नागरिकता निरस्त कर दी जाएगी.

तहव्वुर राणा के लिए यह झटका क्यों है?

2008 में मुंबई हमले के बाद तहव्वुर राणा को मास्टरमाइंड बताया गया था. उस वक्त कनाडा सरकार ने तहव्वुर की भूमिका को खारिज किया था. एफबीआई ने जब तहव्वुर को लेकर रिपोर्ट दी थी, तब भी कनाडा ने उसका समर्थन किया था, लेकिन अब कनाडा की सरकार तहव्वुर से पीछा छुड़ाने में लगी है.

तहव्वुर इस वक्त भारत की जेल में बंद है. वो लगातार अपने लिए काउंसलिर सुविधा की मांग कर रहा है. अपने परिवार से मिलने दिए जाने की मांग कर रहा है. कनाडा अगर उसका समर्थन करता है तो भारत के लिए असमंजस की स्थिति हो जाती, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

तहव्वुर राणा को लेकर भारत सख्त फैसला कर सकता है. पाकिस्तानी मूल के तहव्वुर पर 26/11 हमले की साजिश रचने का आरोप है. तहव्वुर पाकिस्तान सेना में अधिकारी रह चुका है. इस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हुई, जिनमें 2 कनाडा के भी नागरिक थे.

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