भिवानी। फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही जिले में तापमान बढ़ने लगा है और अधिकतम पारा 27 डिग्री तथा न्यूनतम 12 डिग्री तक पहुंच गया है। दोपहर के समय धूप की तपिश से गर्मी का अहसास होने लगा है जबकि सुबह-शाम हल्की ठंड बनी हुई है। मौसम में इस उतार-चढ़ाव का असर खेती और लोगों के स्वास्थ्य दोनों पर दिखाई देने लगा है।
रविवार सुबह मौसम सुहावना रहा और हल्की ठंड महसूस हुई लेकिन दिन चढ़ने के साथ धूप तेज हो गई। दोपहर में गर्मी का माहौल रहा हालांकि शाम होते-होते फिर से ठंड का एहसास हुआ। बदलते मौसम के कारण बाजारों में ऊनी कपड़ों की मांग घटने लगी है जबकि हल्के गर्म कपड़ों की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार 23 फरवरी तक मौसम खुश्क रहने की संभावना है। नमी की स्थिति के चलते गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग के प्रकोप की आशंका जताई गई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से वरिष्ठ गेहूं वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई ने किसानों को प्रतिदिन खेत का निरीक्षण करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि पीला रतुआ प्रायः खेत के किनारों से अंदर की ओर फैलता है। हर पीला पत्ता रतुआ रोग नहीं होता। इसकी पहचान के लिए पत्ते को किसी कपड़े या हाथ पर रगड़ने पर यदि पीला पाउडर निकलता है तो यह रतुआ होने की संभावना है। ऐसी स्थिति में तुरंत स्प्रे का छिड़काव करना चाहिए।
दोपहर की गर्मी कर रही स्वास्थ्य को प्रभावित
बदलते मौसम के कारण लोगों में बदन दर्द, आलस्य, बुखार, खांसी और गले में दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसके चलते शहर के निजी व सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज से फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है, ऐसे में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दोपहर में गर्मी का अहसास होने के बावजूद ठंडी खाद्य सामग्री का सेवन करने से बचें। इस मौसम में दोपहर के समय पंखा चलाने से भी परहेज करें। सुबह-शाम सैर पर जाते समय हल्के गर्म कपड़े पहनें और सीधे ठंडी हवा की चपेट में आने से बचें। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लें। बुखार या बदन दर्द होने पर तुरंत अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श ले।