SMS Hospital: जयपुर में डॉक्टर संभाल रहे पार्किंग और कैंटीन! मरीजों का सवाल- ‘इलाज कौन करेगा?’

जैसलमेर और जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों के रोकथाम के लिए डॉक्टर्स को नोडल अधिकारी बनाने का फरमान क्या आया, सोशल मीडिया पर जैसे तहलका मच गया. विपक्ष ने इसे सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर तंज कसा, लेकिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स, जो भूमिकाएं निभा रहे हैं.उन्हें जानकर आप चौंक जाएंगे. बात सिर्फ प्रदेश के सबसे बड़े जयपुर के एसएमएस अस्पताल की करें तो यहां करीब दो दर्जन से ज्यादा डॉक्टर्स ऐसी-ऐसी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जो सोचने को मजबूर कर देगी. कोई किचन, कैंटीन, स्टेशनरी की व्यवस्था देख रहा है, तो कोई सिक्योरिटी, लॉन्ड्री, हाउसकीपिंग और सीवरेज क्लिनिंग मैनेजमेंट का जिम्मा संभाल रहा है.
यही नहीं डॉक्टर्स पार्किंग,अतिक्रमण, ट्रॉली मैनेजमेंट जैसे काम भी संभाले हुए हैं. इनमें से कुछ डॉक्टर्स तो सालों से ये ही काम कर रहे हैं. जिस कारण से ये मरीजों के इलाज से दूर हो गए हैं. प्रदेश का सबसे बड़ा एसएमएस अस्पताल पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है. यहां के डॉक्टर्स द्वारा की गई सर्जरी हो या फिर ट्रांसप्लांट मरीजों का भरोसा लगातार बढ़ता ही जा रहा है.
इस अस्पताल पर मरीजों का भार इतना है कि आए दिन अव्यवस्थाओं की खबरें सामने आती रहती हैं. ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारों से डॉक्टरों पर दबाव साफ महसूस किया जा सकता है, लेकिन इन सबके बावजूद यहां कई डॉक्टर्स मरीजों को देखना छोड़ अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, जो सिस्टम पर कई सवाल खड़े करती है.
पार्किंग की व्यवस्थाओं और बिल निपटाने में व्यस्त हैं डाॅक्टर
कभी डॉक्टर साहब सिवरेज क्लीनिंग या पार्किंग की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में व्यस्त रहते हैं, तो कभी अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों से गुहार लगाते नजर आते हैं. इन जिम्मेदारियों के कारण एसएमएस अस्पताल के कुछ डॉक्टर्स ऐसे हैं, जिन्होंने सालों से शायद ही किसी मरीज की नब्ज छुई हो. वह अब कीबोर्ड पर टाइपिंग, फाइलों के पन्नों को पलटने और कैंटीन के बिल पास करने में व्यस्त हो गए हैं.
नई नहीं है डाॅक्टरों की ये जिम्मेदारी
एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर्स को इस प्रकार की जिम्मेदारी देने की व्यवस्था कोई नई नहीं है. सालों से ये ही व्यवस्था चल रही है. एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ.दीपक माहेश्वरी ने बताया कि अधीक्षक के साथ एडिशनल सुपरीडेंट्स और डिप्टी सुपरीडेंट्स की टीम बना रखी है. इसके अलावा पीडब्ल्यूडी की टीम भी है. ये सभी टीम मिलकर अस्पताल की व्यवस्थाओं को संभालते हैं.
क्या -क्या काम करते हैं डाॅक्टर्स?
एडिशनल एमओ इंचार्ज डॉ.अरविंद पालावत के पास मौजूदा समय में डीडीओ नॉन गजेटेड, रेडियोग्राफर एंड लैब टेक्नीशियन की जिम्मेदारी है. वहीं डॉ.बीएम शर्मा के पास किचन और कैंटीन की जिम्मेदारी है. डॉ.राजकुमार हर्षवाल के पास स्टेशनरी और ईपीबीएक्स की जिम्मेदारी है.
एडिशनल सुपरिटेंडेंट डॉ.एनएस चौहान के पास अस्पताल के अंदर और पैरीफेरी में अतिक्रमण,आरटीआई, सम्पर्क पोर्टल, सुगम पोर्टल और ग्रिवाइन्स कार्यभार है. डॉ.अजीत सिंह के पास सुरक्षा, चोरी नियंत्रण, अस्पलात वोईलेंस,सीसीटीवी, इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी कन्वीनर,सीजनल डिजीज केस रिपोर्टिंग,धन्वंतरी इंचार्ज और ओपीडी ट्रॉली मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है.
जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर के अध्यक्ष डॉ.राजपाल मीना ने कहा कि अस्पतालों में अलग-अलग व्यवस्था के लिए विभागों के अधिकारियों को ही जिम्मेदारी सौंपना चाहिए. डॉक्टर्स ने जो स्पेशलाइजेशन कर रखा है. उन्हें वहीं जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. एसएमएस या फिर अन्य सरकारी अस्पतालों में कई डॉक्टर्स इस तरह के कामों की जिम्मेदारी संभालने में व्यस्त हैं. उनकी पढ़ाई का लाभ ना तो मरीज को मिल पा रहा है और ना ही सरकार को, लेकिन इसके उलट कई सीएचसी-पीएचसी या फिर जिला अस्पतालों में डॉक्टर्स के पद खाली पड़े हैं.




