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भिवानी: औद्योगिक क्षेत्रों के CETP को मिली बड़ी राहत, अब बिना केंद्रीय पर्यावरण मंजूरी के होगा संचालन

भिवानी। औद्योगिक सेक्टर-21 और 26 में बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के संचालन के लिए अब केंद्रीय पर्यावरण विभाग से मंजूरी (एनओसी) जरूरी नहीं रही। नए नियमों के तहत पर्यावरण मंजूरी की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है और अब जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति मिलने के बाद ही इसका संचालन संभव हो पाएगा। करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह प्लांट पिछले तीन साल से मंजूरी के इंतजार में ठप पड़ा था। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष एनओसी के लिए आवेदन किया जा चुका है और प्रक्रिया जारी है।

इसके साथ ही चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी के बाद ही संचालित हो सकेगा। इसकी अनुमति प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। वहीं दादरी रोड स्थित नगर परिषद के ठोस कचरा निस्तारण प्लांट के लिए पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद ही जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उसे एनओसी जारी करेगा।

दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे-709 ई के रोहतक रोड स्थित पालुवास मोड़ के पास सेक्टर-21 और 26 में सीवर और बरसाती पानी की निकासी के लिए जनवरी 2023 में सीईटीपी तैयार किया गया था। हालांकि पर्यावरण विभाग से संचालन की मंजूरी के इंतजार में यह प्लांट पूरी तरह तैयार होने के बावजूद तीन साल से बंद रहा। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण विभाग को नई गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीईटीपी संचालन के लिए पर्यावरण मंजूरी की शर्त समाप्त कर दी गई है। अब जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ही इसकी एनओसी जारी करेगा और संबंधित विभाग द्वारा संचालन आरंभ किया जाएगा।

सीईटीपी चालू होने से औद्योगिक सेक्टर-21 और 26 में स्थापित करीब 250 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के दूषित पानी और बरसाती पानी की निकासी ढाणा रोड स्थित ड्रेन में संभव हो सकेगी। इस पानी का उपयोग किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए कर सकेंगे।

सीबीएलयू में तैयार एसटीपी, एनओसी की प्रक्रिया जारी

चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के लिए प्रेमनगर में अलग से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। इसके संचालन को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हालांकि इसके संचालन पर पर्यावरण मंजूरी की शर्त लागू नहीं थी, क्योंकि इसे पहले से ही पर्यावरण एनओसी के दायरे से बाहर रखा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी जारी होने के बाद इसका नियमित संचालन संभव हो पाएगा। एसटीपी का दूषित पानी गांव प्रेमनगर के समीप सीधे भिवानी-घग्गर ड्रेन में डाला जाएगा।

औद्योगिक सेक्टर-21 और 26 के लिए बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन को लेकर तीन साल से अधिकारी एनओसी में उलझे हुए हैं। अब हरियाणा सरकार से सीईटीपी को पर्यावरण मंजूरी की छूट मिल गई है, जिसके बाद इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संबंधित अधिकारियों से भी इस संबंध में बातचीत की गई है। उन्होंने भी सीईटीपी को जल्द एनओसी जारी किए जाने का आश्वासन दिया है। हमने सीईटीपी बनवाने के लिए लंबा संघर्ष किया है और इसके संचालन को लेकर भी हर दरवाजे पर दस्तक दी है।

हरियाणा सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन जारी हो चुका है, जिसमें कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को पर्यावरण मंजूरी के दायरे से बाहर कर दिया गया है। प्लांट के संचालन में बड़ी अड़चन पर्यावरण मंजूरी की ही थी। विभाग की तरफ से जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एनओसी के लिए आवेदन किया जा चुका है। एनओसी जारी होने के बाद सीईटीपी का संचालन आरंभ कर दिया जाएगा।
औद्योगिक सेक्टर के कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और सीबीएलयू के एसटीपी की एनओसी के लिए आवेदन आ चुके हैं, जिन पर एनओसी की प्रक्रिया अभी चल रही है। जल्द ही इनके लिए एनओसी संबंधित विभागों को जारी कर दी जाएगी। दादरी रोड के ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट के संचालन को लेकर पर्यावरण मंजूरी अनिवार्य है। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद ही ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट को जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से एनओसी जारी की जाएगी।

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