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गुड़गांव प्रदूषण पर वार: 2026 तक PM 10 और PM 2.5 में 10% कमी का लक्ष्य, 600 किमी सड़कें होंगी पुनर्विकसित

गुड़गांव : बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए गुरुग्राम के विभिन्न विभागों द्वारा वर्ष 2026 के लिए तैयार विस्तृत एनुअल एक्शन प्लान पर कार्य शुरू हो गया है। इस योजना में सड़क धूल नियंत्रण, वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी, निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) गतिविधियों का प्रबंधन और शहरी ट्रैफिक सुधार जैसे प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। योजना का उद्देश्य 2026 तक वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाना और पीएम 10 व पीएम 2.5 के स्तर में कम से कम 10 प्रतिशत की कमी सुनिश्चित करना है।

इस बारे में शुक्रवार को नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में निगम कार्यालय में संबंधित विभागों की मासिक समन्वय बैठक आयोजित हुई, जिसमें वर्ष 2026 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के तहत की जा रही कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में जीएमडीए, नगर निगम, पुलिस, जीएमसीबीएल, एचएसपीसीबी, एचएसवीपी, पीडब्ल्यूडी, एग्रीकल्चर, एनएचएआई आदि विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, शहर में 2021-2024 के औसत स्तर की तुलना में 2026 तक पीएम 10 और पीएम 2.5 में 10 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए शहर में पहले से संचालित तीन निरंतर वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशन के डेटा के आधार पर रणनीति बनाई गई है। योजना में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर विशेष बल दिया गया है। वर्तमान में उपलब्ध सिटी बसों की संख्या आवश्यकता से काफी कम है, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की योजना है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक बसों और ई-चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने का लक्ष्य, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना, स्मार्ट पार्किंग प्रबंधन और भीड़भाड़ कम करने के उपाय आदि कदमों से निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने और ट्रैफिक से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की रणनीति अपनाई गई है।

33 जाम बिंदुओं की पहचान

शहर में 33 प्रमुख ट्रैफिक जाम स्थलों की पहचान करके कई स्थानों पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कार्य की योजना के तहत काम शुरू किया गया है। कुछ स्थानों पर सिग्नल सुधार, लेन प्रबंधन और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड किया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े स्थानों पर फ्लाईओवर और बड़े ढांचागत विकास प्रस्तावित हैं।

सीएंडडी वेस्ट प्रबंधन

गुरुग्राम में प्रतिदिन लगभग 1500 टन सीएंडडी वेस्ट उत्पन्न होता है, जबकि मौजूदा प्रसंस्करण क्षमता 1200 टन प्रतिदिन है। इस अंतर को कम करने के लिए नई सीएंडडी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने, रिसाइकल्ड निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने, सरकारी परियोजनाओं में प्रोसेस्ड मटेरियल अनिवार्य करने की पहल आदि से खुले में मलबा फेंकने और उससे उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

धूल कम करने के लिए 600 किमी से अधिक सड़कें पुनर्विकसित होंगी

सड़क धूल को वायु प्रदूषण का बड़ा कारण मानते हुए 2026-27 के दौरान सैकड़ों किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास की योजना बनाई गई है। इसमें टूटी व कच्ची सड़कों का पक्का निर्माण, रोड एज का सुदृढ़ीकरण, नियमित मैकेनिकल स्वीपिंग और धुलाई आदि कार्य किए जाएंगे। नगर निगम के अधीन लगभग 600 किमी सड़कों को चरणबद्ध तरीके से बेहतर बनाया जाएगा, जिसके लिए विस्तृत मासिक लक्ष्य भी तय किए गए हैं।

तकनीक आधारित ट्रैफिक प्रबंधन

शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पहले से लागू है, जिसमें एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और ऑटोमैटिक चालान प्रणाली शामिल है। दूसरे चरण में 258 स्थानों पर 2722 कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे ट्रैफिक अनुशासन और प्रदूषण नियंत्रण दोनों में मदद मिलेगी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका दूसरे चरण के कार्य में यह मूल्यांकन करेंगे कि इन कैमरों के माध्यम से सफाई व्यवस्था, जलभराव, कचरा व मलबा डंपिंग व सडक़ों के गढ्ढों की भी निगरानी की जा सके।

समन्वित प्रयास से स्वच्छ हवा की दिशा में कदम- निगमायुक्त प्रदीप दहिया

निगमायुक्त प्रदीप दहिया के अनुसार, यह एक्शन प्लान विभिन्न एजेंसियों जैसे ट्रैफिक पुलिस, विकास प्राधिकरणों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड—के समन्वय से लागू किया गया है। नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तय लक्ष्य समय पर पूरे हों और गुरुग्राम की हवा को साफ बनाने की दिशा में ठोस प्रगति हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे उनके विभागों से संबंधित रिपोर्ट प्रतिमाह 5 तारीख से पहले भिजवाना सुनिश्चित करें, ताकि केन्द्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को समय पर रिपोर्ट भेजी जा सके।

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