हरियाणा

312 गांवों में विकास कार्यों पर ब्रेक: कोरम पूरा न होने से ग्राम सभा की बैठकें टलीं, ग्रामीण परेशान

भिवानी। सरकार के नए नियमों से जिले के 312 गांवों में विकास की चाल अब बिगड़ गई है। ऐसे में कोरम पूरा नहीं कर पा रही ग्राम सभाएं भी बेहाल हैं क्योंकि उनमें न तो ग्रामीण रुचि दिखा रहे हैं न ही विकास पर मंथन हो पा रहा है। अब तक ग्राम सभाओं का एक के बाद एक तीसरा दौर चल चुका है मगर किसी भी ग्राम सभा में कोरम के अनुरूप ग्रामीणों की भागेदारी नहीं हो पा रही है।

सरपंचों का तर्क है कि किसी के पास ग्राम सभा में आने का समय नहीं है हस्ताक्षर करने को तो लोग तैयार हैं मगर ग्राम सभा में उपस्थिति में असमर्थता जता रहे हैं। ऐसे में अब जिले के सभी गांवों में नए विकास के मसौदे ठप होकर रह गए हैं। वहीं सरपंच एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष ने रविवार को गांव कालुवास में सरपंचों की बैठक बुलाई है जिसमें मौजूदा हालातों पर मंथन कर आगामी रणनीति तय की जाएगी।

सरकार की तरफ से सभी गांवों में विकास कार्यों के लिए कुल जनसंख्या का 40 फीसदी कोरम (गणपूर्ति) ग्राम सभा में मौजूदगी आवश्यक की गई है। जिसके बाद ही किसी प्रस्ताव पर सहमति से ही काम होगा। ऐसे में अब ग्राम पंचायतों के सामने कठिनाई यह है कि पहले तो गांव की कुल आबादी का 40 फीसदी लोगों को एक जगह जुटाना फिर उनके प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराकर सहमति ले पाना असंभव लग रहा है। हालांकि कुछ गांवों में कोरम पूरा करने की कोशिश की गई मगर कामयाबी नहीं मिली।

शनिवार को जिले भर की ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं बुलाई गई। लेकिन किसी का भी कोरम पूरा नहीं हुआ। ग्रामीण आबादी में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी ग्राम सभा की बैठक में कोरम पूरा होना जरूरी किया गया है। ऐसे में गांव में बुजुर्ग पेंशन, लाडो लक्ष्मी योजना के अलावा जो भी सरकार की तरफ से योजनाएं ग्रामीणों को मिल रही हैं उन्हें जारी रखना भी ग्राम सभा की बैठक पर ही टिका है।

राजनीतिक गुटबाजी और आपसी मतभेद भी बन रहे अड़चन

गांव की राजनीति भी बड़ी जटिल है क्योंकि चुनावी रंजिश के चलते पूरा गांव एक नहीं हो पाता है। ऐसे में अगर पंचायत की तरफ से ग्राम सभा बुलाई जाती है तो उसमें भी गुटबाजी के चलते ग्रामीण और खासकर पंच भी नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में कुल आबादी का 40 फीसदी को जुटाना बड़ा चुनौति भरा काम है। वहीं ग्रामीण भी गांव की राजनीति में सक्रिय भागीदारी को लेकर अभी जागरूक नहीं हैं। हर कोई अपने काम को प्राथमिकता दे रहा है जबकि गांव का विकास उनके लिए दोयम दर्जे में आता है।

ग्राम सभा की अब तक दो बैठकें बुला चुके हैं लेकिन किसी भी बैठक में कोरम पूरा नहीं हो पाया है। ग्रामीण प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने को तो तैयार हैं लेकिन समय की मजबूरी जताकर ग्राम सभा की बैठक में आने को तैयार नहीं हैं। हर किसी के पास अपना काम और सीमित समय रहता है। ऐसे में ग्राम सभा में आना और इतनी बड़ी तादाद में एक जगह ग्रामीणों को जुटा पाना संभव नहीं है। ये बेतुका फरमान है जिससे गांवों का विकास ठप हो गया है।

ग्राम सभा को लेकर सभी ग्राम पंचायतों के सामने विकट स्थिति बन चुकी है। इस स्थिति को लेकर रविवार को सरपंचों की बैठक गांव कालुवास में बुलाई गई है। बैठक में ग्राम सभा को लेकर थोपी गई शर्त पर मंथन किया जाएगा और इस विकट परिस्थिति से उबरने के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी। क्योंकि ग्राम सभा का कोरम पूरा नहीं होने की वजह से किसी भी गांव में नए विकास के काम नहीं हो पा रहे हैं। पहले से चल रहे विकास कार्य भी बजट की लेटलतीफी की वजह से लटके हुए हैं। इससे गांव में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में भी आक्रोश बढ़ रहा है।

भिवानी खंड के अंतर्गत 78 ग्राम पंचायतें आ रही हैं। इसमें से अब तक केवल पांच ग्राम पंचायतों की ग्राम सभा का कोरम पूरा हुआ है। इनमें बडेसरा, ढाणा नरसान, धीराणा देवसर माजरा, कितलाना शामिल हैं। अभी तक तो ग्राम सभाओं का शेड्यूल मुख्यालय से आ रहा है बाद में ये शेड्यूल ग्राम पंचायतों को खुद तय करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र में सरकार की तरफ से मिल रही योजनाओं का लाभ लेने वालों को लेकर ग्राम सभाएं कराई जा रही हैं। इसमें 40 फीसदी आबादी का कोरम पूरा करना अनिवार्य है।

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