धर्म/अध्यात्म

माघ पूर्णिमा का क्या है धार्मिक महत्व? जानें शास्त्रों के अनुसार क्यों है यह तिथि इतनी पवित्र

माघ मास की पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है. इस साल में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी यानी शनिवार को मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 को सुबह 5:52 बजे से शुरू होकर 2 फरवरी 2026 को रात 3:38 बजे तक रहेगी. इस दौरान विशेष पूजा, स्नान और दान करने का विधान बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन की गई साधना और धार्मिक अनुष्ठान से जीवन में पापों का नाश होता है और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है.

शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा को स्नान और पूजा करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे धर्म की प्राप्ति होती है. इस दिन की गई साधना व्यक्ति को विशेष रूप से मानसिक और आत्मिक शुद्धि प्रदान करती है. मान्यता है कि माघ मास की पूर्णिमा में स्नान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. भगवद पुराण और पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि माघ पूर्णिमा में गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी होता है. इस दिन किए गए दान और तप से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

शास्त्रों में माघ पूर्णिमा के अनुष्ठान

माघ पूर्णिमा पर घर में या नदी किनारे पूजा और हवन करना शुभ माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन दीपक जलाना, आरती करना और भगवान विष्णु या शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी है. पुराणों में कहा गया है कि माघ पूर्णिमा में दान करने से दस वर्षों तक किए गए पाप भी नष्ट हो जाते हैं. धार्मिक अनुष्ठानों में फल, दूध, मिठाई और वस्त्र दान करना विशेष महत्व रखता है. यह दिन साधकों के लिए अपने कर्मों की शुद्धि और मन की शांति प्राप्त करने का अवसर है.

माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान का महत्व

माघ पूर्णिमा को पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से शरीर, मन और आत्मा की अशुद्धियां दूर होती हैं. साथ ही, इस दिन किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. गरीबों को अन्न, वस्त्र, धन और भोजन दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. स्नान और दान के साथ ही मन से भगवान की भक्ति करना आवश्यक है. यह संयोजन जीवन में धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है.

माघ पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं और फल

माघ पूर्णिमा का व्रत और पूजा करने से जीवन में रोग, भय और दुखों का नाश होता है. शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन की गई साधना से मोक्ष की प्राप्ति संभव है. माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करने से पूर्व जन्मों के पाप भी समाप्त हो जाते हैं. भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान और व्रत से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में स्थायी सुख और शांति आती है. यही कारण है कि माघ पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है.

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