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शहर की सफाई का नया फॉर्मूला: अब किलोमीटर नहीं, वर्ग मीटर के हिसाब से चकाचक होंगे वार्ड

भिवानी। अब शहर की सफाई व्यवस्था किलोमीटर के बजाय वर्ग मीटर (क्षेत्रफल) के आधार पर तय की जाएगी। इसके लिए नगर परिषद ने नई कार्य योजना का विस्तृत खाका तैयार कर मुख्यालय को भेज दिया है। यह बदलाव सफाई की गुणवत्ता में सुधार, कचरा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने और संकरी गलियों को भी स्वच्छता के दायरे में लाने के उद्देश्य से किया गया है।

हवा में प्रदूषण को कम करने के लिए नगर परिषद ने करीब 47 लाख रुपये की लागत से एंटी स्मॉग गन मशीन की खरीद की है। इसके अलावा शहर के मुख्य मार्गों और सर्कुलर रोड की सफाई के लिए करीब 50 लाख रुपये के बजट से नगर परिषद अपनी स्वीपिंग मशीन भी खरीदेगी। इसका प्रस्ताव पास हो चुका है।

शहर का क्षेत्रफल करीब 450 किलोमीटर दायरे में आंका गया है। इससे पहले नगर परिषद द्वारा तीन चरणों में किलोमीटर के आधार पर सफाई की उच्च प्राथमिकता, प्राथमिकता और सामान्य श्रेणी तय की गई थी। अब वर्ग मीटर के हिसाब से सफाई की प्राथमिकता निर्धारित की गई है जिसका खाका मुख्यालय को भेजा गया है। उच्च अधिकारी इसकी जांच कर कमियों को चिह्नित करेंगे और यह बताएंगे कि इसमें क्या जोड़ा जाए और क्या हटाया जाए।

नगर परिषद द्वारा शहर की सफाई का ठेका अब पांच साल के लिए तय किया जाएगा जिस पर सालाना करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत सरकार के न्यूनतम मेहनताना के अनुसार 250 नए सफाई कर्मचारी भी लगाए जाएंगे। नए मानकों के अनुसार अब सड़कों की लंबाई के बजाय कुल सफाई योग्य क्षेत्रफल के आधार पर मैनपावर और मशीनों की तैनाती की जाएगी।

नगर परिषद ने सटीक मैपिंग कराकर इसका विवरण भी मुख्यालय को भेजा है। नए सफाई खाके में हर वार्ड के चप्पे-चप्पे को मैपिंग के जरिए शामिल किया गया है। इससे कचरा संग्रहण और निस्तारण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी तथा संकरी गलियों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।

शहर की सड़कों पर धूल कणों व प्रदूषण को नियंत्रित करेगी स्मॉग गन मशीन

भिवानी जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आता है। ऐसे में जब भी हवा में प्रदूषण स्तर (एक्यूआई) बढ़ता है तो ग्रेप-तीन और ग्रेप-चार के आदेश लागू हो जाते हैं। ग्रेप-चार के दौरान खनन उत्सर्जन के अलावा सभी प्रकार के निर्माण कार्य भी बंद कर दिए जाते हैं। हवा में प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए एंटी स्मॉग गन मशीन का प्रयोग किया जाता है। अब तक जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड खनन करने वाली कंपनियों से यह मशीन लेकर इसका उपयोग करता रहा है लेकिन अब नगर परिषद शहरी क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्वयं की स्मॉग गन मशीन का उपयोग कर सकेगी। इसके लिए नगर परिषद ने 47 लाख रुपये की लागत से नई स्मॉग गन मशीन की खरीद की है।

ये है एंटी स्मॉग गन

एंटी स्मॉग गन एक प्रकार की मशीन है जो नेबुलाइज्ड पानी की बारीक बूंदों का हवा में छिड़काव करती है। इसे पानी के टैंक से जोड़ा जाता है और हाई-प्रेशर प्रोपेलर के माध्यम से 50 से 100 माइक्रोन की सूक्ष्म बूंदों को हवा में छोड़ा जाता है। इससे धूल और प्रदूषण के कण अवशोषित होने लगते हैं और हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है जिससे वातावरण सांस लेने योग्य बना रहता है।

चार माह से खराब पड़ी स्वीपिंग मशीन कराई ठीक

फिलहाल ठेकेदार की स्वीपिंग मशीन सर्कुलर रोड पर सफाई का कार्य कर रही है जो करीब चार माह बाद ठीक होकर दोबारा सड़क पर उतरी है। इन चार महीनों के दौरान सर्कुलर रोड की सफाई मैनुअल तरीके से कराई जा रही थी। नगर परिषद जल्द ही करीब 50 लाख रुपये के बजट से अपनी स्वीपिंग मशीन भी खरीदेगी। स्वीपिंग मशीन के जरिए शहर के सर्कुलर रोड और मुख्य क्षेत्रों में नियमित रूप से सफाई कार्य किया जाएगा। वर्तमान में सर्कुलर रोड सहित रोहतक रोड और हांसी रोड पर स्वीपिंग मशीन से सफाई का कार्य ठेके पर कराया जा रहा है।

नगर परिषद ने पांच साल के लिए सफाई की कार्य योजना का खाका मुख्यालय भेजा है जिसमें किलोमीटर के बजाय अब वर्ग मीटर के आधार पर सफाई की प्राथमिकता तय की गई है। नगर परिषद ने अपनी नई स्मॉग गन मशीन खरीद ली है जिसका उपयोग हवा में प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही नगर परिषद जल्द ही अपनी स्वीपिंग मशीन भी खरीदेगी जिससे शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए हम सभी मिलकर कृतसंकल्प होकर निरंतर कार्य कर रहे हैं।

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