धर्म/अध्यात्म

शुक्र प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और आरती की पूरी जानकारी

भोलेनाथ के भक्त आज प्रदोष व्रत रख रहे हैं. ये दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत का है. इस व्रत को लेकर मान्यता है कि प्रदोष काल के समय भोलेनाथ और मां पार्वती कैलाश पर्वत पर विराजमान रहते हैं. जो भी भक्त उनकी आराधना करता है वे उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस शुभ घड़ी में की गई पूजा, जलाभिषेक और मंत्र का जाप करने से जीवन सभी कष्ट, रोग और भय दूर हो जाते हैं.

द्रिक पंचाग के मुताबिक, प्रदोष व्रत की पूजा का समय आज यानी शुक्रवार को 5 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो रहा है और रात 8 बजकर 37 मिनट तक है. श्रद्धालुओं को पूजा करने का समय 2 घंटे 38 मिनट मिलेगा आज माघ महीने की शुक्ल त्रयोदशी 11 बजकर 9 मिनट से शुरू हो रही है और 31 जनवरी 8 बजकर 25 मिनट तक जारी रहेगी.

प्रदोष व्रत को लेकर मान्यताएं

पंचाग के मुताबिक, ‘दक्षिण भारत में प्रदोष व्रत को प्रदोषम के नाम से जाना जाता है. इस व्रत को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है. प्रदोष व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है, जिसमें से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है. कुछ लोग शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के प्रदोष के मध्य भेद करते हैं. प्रदोष का दिन जब सोमवार को आता है तो उसे सोम प्रदोष कहते हैं, मंगलवार को आने वाले प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं. अगर प्रदोष शनिवार के दिन आता है उसे शनि प्रदोष कहा जाता है.’

द्रिक पंचाग के मुताबिक, ‘जिस दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है. प्रदोष काल सूर्यास्त से प्रारम्भ हो जाता है. जब त्रयोदशी तिथि और प्रदोष साथ-साथ होते हैं वह समय शिव पूजा के लिS सर्वश्रेष्ठ होता है. ऐसा माना जाता है कि प्रदोष के समय शिवजी प्रसन्नचित मनोदशा में होते हैं.’

प्रदोष व्रत की पूजा सामग्री

पूजा की सामग्री में जल से भरा लोटा, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, चंदन, धूप, दीपक (घी या तेल), कपूर, फल, मिठाई और अक्षत शामिल करें.

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें.
  • साफ और पवित्र कपड़े पहनें.
  • घर के मंदिर की साफ-सफाई कर शिवलिंग की स्थापना करें.
  • व्रत का संकल्प लें कि मैं प्रदोष व्रत भोलेनाथ की कृपा के लिए कर रहा हूं या फिर कर रही हूं.
  • शाम के समय प्रदोष काल में पूजा शुरू करें.
  • सबसे पहले शिवलिंग पर जलाभिषेक करें, फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें.
  • इसके बाद दोबारा जल से शिवलिंग को शुद्ध करें.
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल चढ़ाएं.
  • शिवलिंग के पास दीप जलाएं और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें.
  • साथ ही साथ गणेश, पार्वती, नंदी की भी पूजा करें.
  • आखिरी में शिवजी की आरती करें और उनसे पूजा में हुईं त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें.

भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे।

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी।

जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।

भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥

ओम जय शिव ओंकारा॥ स्वामी ओम जय शिव ओंकारा॥

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