हरियाणा

जलभराव और ओलावृष्टि की दोहरी मार से कराह रहा किसान

पूंजीपति समर्थक छवि छोड़ अब किसान और मजदूर की सुध ले भाजपा सरकार : नरेश तंवर पहले जलभराव, अब ओलावृष्टि से किसान पर दोहरी मार तो मनरेगा बंद कर सरकार ने मजदूरों के पेट पर मारी लात : नरेश तंवर

भिवानी,(ब्यूरो): प्रदेश में प्राकृतिक आपदा और सरकार की कथित बेरुखी ने अन्नदाता और मजदूरों को दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। पिछले कई महीनों से खेतों में जमा जलभराव, उसके बाद हुई ओलावृष्टि और अब मनरेगा के काम पर लगी रोक ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश तंवर (जीएम) ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे किसान व मजदूर विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताया है। कांग्रेस नेता नरेश तंवर ने कहा कि प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कई महीनों से खेतों से पानी की निकासी नहीं हुई है। किसान की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस राहत या मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए था कि वह न केवल खराबे का उचित मुआवजा दे, बल्कि संकट की इस घड़ी में किसानों के बीमा प्रीमियम की राशि भी माफ करे। लेकिन यहां तो किसान को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। जलभराव की मार झेल रहे किसानों पर हाल ही में हुई ओलावृष्टि कोढ़ में खाज की तरह साबित हुई है। तंवर ने कहा कि जो थोड़ी-बहुत उम्मीद बची थी, उसे कुदरत के साथ-साथ सरकार की सुस्ती ने खत्म कर दिया है। दोहरी मार झेल रहा किसान आज कर्ज के नीचे दबने को मजबूर है। बीमा प्रीमियम के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरते हुए नरेश तंवर ने पिछले रिकॉर्ड्स का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा जाता था और उनसे बीमा प्रीमियम की राशि नहीं वसूली जाती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार किसानों की जेब से प्रीमियम काटकर कंपनियों की तिजोरी भर रही है, जबकि आपदा के समय किसान को क्लेम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। किसानों के साथ-साथ मजदूरों की बदहाली पर चिंता जताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने मनरेगा को बंद कर ग्रामीण मजदूरों के हितों पर सीधा प्रहार किया है। नरेश तंवर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने तुरंत जल निकासी का प्रबंध नहीं किया, मुआवजे का वितरण शुरू नहीं किया और मनरेगा को सुचारू रूप से बहाल नहीं किया, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर सडक़ों पर उतरने को मजबूर होगी। उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी पूंजीपति समर्थक छवि छोड़ अब किसान और मजदूर की सुध ले।

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