भिवानी के लाल मुकुंद तंवर का कमाल : 13 साल से गड्ढे में पड़े शीरे को बेचकर शुगर मिल को दिलाई संजीवनी
भिवानी, 29 जनवरी : कहते हैं कि अगर इरादे नेक हों और प्रबंधन सटीक तो कचरे से भी कंचन बनाया जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है भिवानी जिले के गांव बापोड़ा के निवासी और एचसीएस अधिकारी मुकुंद तंवर ने। वर्तमान में महम को-ऑपरेटिव शुगर मिल के प्रबंध निदेशक (एमडी) के रूप में कार्यरत मुकुंद तंवर को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए गणतंत्र दिवस समारोह में सहकारिता मंत्री डा. अरविंद शर्मा द्वारा प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है। मुकुंद तंवर के मार्गदर्शन में उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के परिणाम स्वरूप महम चीनी मिल को गणतंत्र दिवस समारोह में सहकारिता मंत्री डा. अरविन्द शर्मा द्वारा प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया है।
इस सफलता की सबसे दिलचस्प कहानी मिल परिसर के एक गड्ढे से जुड़ी है। फरवरी 2013 में मिल का एक बड़ा टैंक फट गया था, जिससे भारी मात्रा में शीरा बहकर एक बड़े गड्ढे में जमा हो गया था। पिछले 13 वर्षों से कई अधिकारी आए और गए, लेकिन किसी ने इस बेकार पड़े शीरे की सुध नहीं ली। फरवरी 2025 में जब मुकुंद तंवर ने कार्यभार संभाला, तो उन्होंने अपनी स्मार्ट मैनेजमेंट तकनीक का उपयोग किया। उन्होंने गड्ढे में पड़े 5500 क्विंटल शीरे की टेस्टिंग करवाई तथा जांच में पाया गया कि यह इंसानों या पशुओं के काम का तो नहीं, लेकिन औद्योगिक उपयोग के योग्य है। इसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए 80 लाख रुपये में बेचा गया, जिससे मिल को सीधा आर्थिक लाभ हुआ।
मुकुंद तंवर मूल रूप से गांव बापोड़ा के रहने वाले हैं। बापोड़ा गांव सैन्य और प्रशासनिक सेवाओं में अपने योगदान के लिए जाना जाता है, और अब मुकुंद तंवर ने अपनी कार्यशैली से गांव और पूरे भिवानी जिले का नाम रोशन किया है। एक एचसीएस अधिकारी के रूप में उनकी इस दूरदर्शी सोच ने साबित कर दिया कि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग कैसे किया जाता है।
मुकुंद तंवर के नेतृत्व में केवल एक वर्ष में महम मिल ने जो मुकाम हासिल किया है, वह मिसाल है। 13 साल से बेकार पड़े शीरे से 80 लाख रुपये की कमाई। पिछले सत्र की तुलना में परिचालन खर्च में 8 करोड़ रुपये की बचत। गन्ना उत्पादन रकबा बढक़र 13 हजार155 एकड़ हुआ तथा किसानों की संख्या 1009 से बढक़र 1201 हुई। मिल परिसर में पड़े कबाड़ को बेचकर 43.24 लाख रुपये जुटाए। किसानों को 10 जनवरी तक 17.07 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
सहकारिता मंत्री ने मुकुंद तंवर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके स्मार्ट मैनेजमेंट के कारण ही मिल आज बिना किसी कर्ज के अपने खर्च निकाल पा रही है। मिल के मुख्य लेखा अधिकारी आनंद बामल ने एमडी की ओर से यह सम्मान प्राप्त किया।




