पंजाब

कोठी तोड़ने का मिला नोटिस तो किसान ने लगाया गजब का दिमाग, अब सड़क के बीच से ‘पैदल’ चलकर दूसरी जगह जा रहा घर

एक अपना घर हो… यह हर इंसान का सपना होता है. लेकिन ज़रा सोचिए, अगर अचानक कोई आकर कह दे कि आपका घर सड़क के बीच आ रहा है, इसे हटा दीजिए तो क्या बीतेगी? कुछ ऐसा ही पंजाब के बरनाला जिले के गांव संधू कलां के किसान सुखप्रीत सिंह के साथ हुआ. एक सरकारी नोटिस ने उनके सपनों की नींव हिला दी, मगर उन्होंने हार नहीं मानी. अपने आशियाने को टूटता देखने के बजाय सुखप्रीत सिंह ने ऐसा जज़्बा दिखाया कि पूरे घर को ही करीब 300 फीट दूर खिसकाने का फैसला कर लिया, ताकि सपनों की कोठी भी बची रहे और रास्ता भी बन सके.

सुखप्रीत सिंह ने साल 2017 में अपनी दो मंजिला कोठी बनानी शुरू की थी. करीब तीन साल की मेहनत और जीवनभर की कमाई लगाकर 2020 में घर लगभग तैयार हो गया था. परिवार के मुताबिक इस घर पर 70 से 75 लाख रुपये तक खर्च हुए. बस रंग-रोगन का काम बाकी था कि तभी एक नोटिस ने उन्हें हिलाकर रख दिया. नोटिस में बताया गया कि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे लुधियाना-बठिंडा ग्रीन फील्ड हाईवे की जद में उनकी कोठी आ रही है और इसे हटाना होगा.

कोठी गिराने के आदेश हो गए थे जारी

घर का करीब 100 से 150 फीट हिस्सा सड़क परियोजना में आ रहा था. प्रशासन ने कोठी गिराने के आदेश भी जारी कर दिए. परिवार का कहना है कि जब अधिकारी कार्रवाई के लिए पहुंचे तो उन्होंने विरोध किया, यहां तक कि घर बचाने के लिए हाई-वोल्टेज बिजली टावरों पर भी चढ़ना पड़ा. इस विवाद के कारण सड़क परियोजना का काम भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ.

लेकिन सुखप्रीत सिंह ने हार नहीं मानी. उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो देखे, जिनमें जैकों की मदद से पूरी इमारतों को बिना तोड़े एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा था. इसके बाद उन्होंने ऐसी ही एक टीम से संपर्क किया और कोठी को गिराने के बजाय शिफ्ट करने का फैसला लिया.

10 मजदूरों की टीम घर को खिसका रही

फिलहाल 10 मजदूरों की टीम विशेष जैकों की मदद से घर को धीरे-धीरे खिसका रही है. रोजाना लगभग 7 से 8 फीट तक इमारत को आगे बढ़ाया जा रहा है. अब तक करीब 100 से 115 फीट हिस्सा शिफ्ट किया जा चुका है और कुल मिलाकर इसे सड़क से करीब 300 फीट दूर ले जाया जाना है. यह काम पिछले डेढ़ महीने से चल रहा है और अनुमान है कि अगले डेढ़ महीने में पूरा हो जाएगा.

घर शिफ्ट करने वाली टीम के सदस्य गुरमेल सिंह के अनुसार, परिवार के साथ लिखित समझौते के बाद काम शुरू किया गया. सिर्फ लेबर कॉस्ट ही करीब 10.36 लाख रुपये है. पूरा ऑपरेशन तकनीकी रूप से जोखिम भरा जरूर है, लेकिन अब तक घर सुरक्षित है.

इस दौरान सुखप्रीत सिंह का परिवार पिछले तीन महीनों से घर से बाहर टेंट में रहने को मजबूर है. सर्द मौसम में खुले में रहना उनके लिए बड़ी चुनौती है. परिवार का आरोप है कि सरकार ने उनकी संपत्ति का सही मुआवजा नहीं दिया. उनका कहना है कि जहां घर की लागत 75 लाख रुपये के करीब थी, वहीं मुआवजे के रूप में उन्हें करीब 60 लाख रुपये ही मिले.

परिवार के बुजुर्ग मक्खन सिंह और बिंदर कौर का कहना है कि यह घर सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उनके सपनों और भावनाओं से जुड़ा है. घर टूटता देखने से बेहतर उन्होंने उसे सरकते हुए देखना मंजूर किया. अब पूरा परिवार इसी उम्मीद में है कि उनका आशियाना सुरक्षित नई जगह पर खड़ा हो जाएगा.

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