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हरियाणा में गहरा सकता है बिजली संकट! उत्पादन ठप होने से मचेगा हाहाकार, सामने आई यह बड़ी वजह

चंडीगढ़:  हरियाणा में यमुना नदी पर स्थित हथिनी कुंड बैराज का जलस्तर घटने से पनबिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है लेकिन राज्य की बिजली सप्लाई पर इसका असर फिलहाल सीमित माना जा रहा है। जनवरी 2026 में हथिनी कुंड बैराज पर पानी का बहाव घटकर लगभग 2300 से 3500 क्यूसेक के बीच रह गया है जो पनबिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता है।

जलस्तर कम होने का सीधा असर बैराज के आसपास संचालित चार छोटी पनबिजली इकाइयों ताजेवाला, नैनावाली, भूड़कलां और बेगमपुर पर पड़ा है। इन चारों इकाइयों की कुल स्थापित क्षमता करीब 64 मेगावाट है लेकिन पानी की कमी के चलते पूर्ण उत्पादन क्षमता में करीब 40 से 50 फीसदी तक की गिरावट आंकी जा रही है।

हिमालयी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का भी जलस्तर पर असर पड़ा है। सर्दियों में बर्फ जमने से यमुना में पानी का बहाव घट जाता है। प्रदेश में तकरीबन 17 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता की परियोजनाएं हैं जबकि सर्दियों में लगभग 8 हजार मेगावाट की खपत चल रही है हालांकि गर्मियों में खपत बढ़कर 15 हजार मेगावाट तक पहुंच जाती है।

पानीपत, खेदड़ और यमुनानगर स्थित थर्मल संयंत्र राज्य की बिजली आपूर्ति की रीढ़ हैं। प्रदेश में पनबिजली का योगदान कुल उत्पादन का केवल 2 से 3 फीसदी ही है। इसी वजह से हथिनी कुंड की पनबिजली इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने से राज्य की बिजली सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ रहा है।

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